दरभंगा: 150 वर्ष पुराने अलीनगर राजस्व हाट पर अतिक्रमण, स्थानीय लोगों ने उठाई कार्रवाई की मांग

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अलीनगर हाट का सिमटता स्वरूप: 150 साल पुरानी पहचान पर संकट

150 साल से अधिक पुराने अलीनगर के ऐतिहासिक राजस्व हाट का स्वरूप लगातार सिमटता जा रहा है. कभी पूरे इलाके की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह हाट अब अतिक्रमण और गंदगी से जूझ रहा है. स्थानीय लोग प्रशासन से इसकी गरिमा और स्वच्छता बहाल करने की गुहार लगा रहे हैं.

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Darbhanga News: दरभंगा जिले के अलीनगर अंचल मुख्यालय स्थित करीब 150 वर्ष पुराना ऐतिहासिक राजस्व हाट अपनी पुरानी पहचान खोता जा रहा है. कभी पूरे इलाके की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा यह हाट अब अतिक्रमण, गंदगी और बदलते बाजारों के कारण सिमटकर केवल सब्जी, फल, मसाले और मछली की बिक्री तक सीमित रह गया है. स्थानीय लोग प्रशासन से इसकी गरिमा और स्वच्छता बहाल करने की मांग कर रहे हैं.

चार एकड़ से सिमटकर तीन एकड़ में रह गया हाट

जानकारी के अनुसार, राजस्व हाट का कुल रकबा 4 एकड़ 42 डिस्मिल है. हालांकि लगातार हुए अतिक्रमण के कारण अब करीब तीन एकड़ भूमि ही उपयोग में दिखाई देती है.

हाट परिसर और आसपास कचरे का ढेर लगा रहता है. नियमित सफाई नहीं होने से दुर्गंध फैलती है, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

कभी पूरे इलाके का सबसे बड़ा बाजार था

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि 19वीं शताब्दी के अंतिम दौर में स्थानीय जमींदारों ने लोगों की सुविधा के लिए इस हाट की शुरुआत कराई थी. उस समय दूर-दूर तक कोई बड़ा बाजार नहीं था.

यहां राशन, कपड़े, मिट्टी और लकड़ी के सामान, कृषि उपकरण, चौकी-खाट, ओखली-मूसल के साथ बैल, गाय और अन्य मवेशियों की भी खरीद-बिक्री होती थी. व्यापारी बैलगाड़ियों और घोड़ों पर सामान लेकर आते थे और ग्राहक कई किलोमीटर दूर से खरीदारी करने पहुंचते थे.

खेल मैदान भी हुआ वीरान

यह हाट मैदान कभी क्रिकेट, कबड्डी और अन्य खेल प्रतियोगिताओं का भी प्रमुख केंद्र हुआ करता था. लेकिन आज अतिक्रमण और गंदगी के कारण खेल गतिविधियां लगभग बंद हो चुकी हैं और मैदान सूना पड़ा रहता है.

आजादी के बाद बना राजस्व हाट

देश की आजादी के बाद इस जमीन को राजस्व हाट के रूप में दर्ज किया गया. बाद में इसी परिसर में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, किसान भवन, ट्राइसम भवन और प्रतिनिधि भवन का निर्माण हुआ. कई वर्षों तक यहां अंचल कार्यालय, प्रखंड कार्यालय और थाना भी संचालित होते रहे.

समय के साथ लोगों ने कच्चे मकान और दुकानें बनाकर स्थायी व्यवसाय शुरू कर दिया. अतिक्रमण हटाने की कई बार तैयारी हुई, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी.

लोगों ने दिया यह सुझाव

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फिलहाल अतिक्रमण हटाना संभव नहीं है तो अंचल प्रशासन व्यवसायियों से निर्धारित किराया लेकर राजस्व वसूले. इससे सरकार को आय होगी और करीब दो दर्जन परिवारों का रोजगार भी सुरक्षित रहेगा. लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द प्रभावी कदम उठाकर इस ऐतिहासिक राजस्व हाट की स्वच्छता, व्यवस्था और पुरानी पहचान को बहाल करे.

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M.D. Aizuddin Sarim

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