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बिहार में न्याय मिलने की राह आसान नहीं, मुकदमों के बोझ तले अदालत, 35 लाख केस पेंडिंग

Updated at : 09 Apr 2023 4:21 AM (IST)
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बिहार में न्याय मिलने की राह आसान नहीं, मुकदमों के बोझ तले अदालत, 35 लाख केस पेंडिंग

बिहार की अदालतों में करीब 35 लाख मुकदमे सुनवाई के लिए लंबित हैं. ऊपरी अदालतों में लें, तो पटना हाइ कोर्ट में दो लाख 13 हजार 439 मुकदमों की सुनवाई बाकी है. इनमें एक लाख 2186 क्रिमिनल केस हैं. वहीं, एक लाख 11 हजार 253 सिविल मामले सुनवाई के लिए रजिस्टर्ड हैं.

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मिथिलेश, पटना. गोपालगंज से चंद रोज पहले एक खबर आयी कि एक शख्स ने अपने पड़ोसी पर मारपीट का मुकदमा दर्ज किया. 30 साल हो गये अदालतों की चौखट पर दौड़ लगाते. मुकदमा करने वाले व्यक्ति की मौत हो गयी. केस चलता रहा. अब जाकर कोर्ट का फैसला आया. जिस शख्स पर मारपीट का आरोप था, उसे डांट फटकार कर छोड़ दिया गया. यह कोई एक केस नहीं है. राज्य की अदालतों में करीब 35 लाख मुकदमे सुनवाई के लिए लंबित हैं. ऊपरी अदालतों में लें, तो पटना हाइ कोर्ट में दो लाख 13 हजार 439 मुकदमों की सुनवाई बाकी है. इनमें एक लाख 2186 क्रिमिनल केस हैं. वहीं, एक लाख 11 हजार 253 सिविल मामले सुनवाई के लिए रजिस्टर्ड हैं.

पटना हाइकोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 53 है, जबकि मात्र 32 जज ही अभी कार्यरत हैं. अब भी जजों के 21 पद खाली हैं. जिला अदालतों में मुकदमों की भीड़ अधिक है. नेशनल जूडिशयल डाटा ग्रिड के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बिहार की अदालतों में 35 लाख के करीब मुकदमे लंबित हैं. बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 31 वीं न्यायिक सेवा के अधिकारियों की हुई नियुक्ति जोड़ने के बाद भी कुल जजों की संख्या मात्र 1535 ही पहुंच पायी है. ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अदालतों पर बढ़ रहे मुकदमों का बोझ अगले कुछ दशकों तक कम नहीं होने वाला. देश की बात करें तो अदालतों में चार करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं.

पटना हाइकोर्ट में जजों के 21 पद खाली

पटना उच्च न्यायालय में हाल ही में जजों की संख्या बढ़ायी गयी है. इसके बावजूद 21 पद अब भी खाली हैं. इन पदों पर नियुक्ति हो जाए तो कुछ हद तक केस की सुनवाई और डिस्पोजल की संख्या बढ़ सकेगी. अभी आलम यह है कि पिछले साल दिसंबर में अग्रिम जमानत के दायर मामले की सुनवाई के लिए बन रही सूची तक भी नहीं पहुंच पा रही है. हालांकि, सरकार और कोर्ट प्रशासन की ओर से जूडिशियल अधिकारियों व सपाेर्टिंग स्टाफ की बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गयी है. बावजूद मुकदमों की लंबित संख्या को देखते हुए यह काफी नहीं है.

हाइकोर्ट में 2814 मामले 30 साल से पेंडिंग

हाइकोर्ट में 2814 मामले ऐसे हैं जो 30 साल से अधिक समय से लंबित हैं. 20 से 30 साल तक लंबित मुकदमों की संख्या 5293 है.10 से 20 सालों से लंबित मामले 24,889 हैं. पांच से 10 साल से लंबित 47,675 और तीन से पांच साल तक लंबित मुकदमों की संख्या 47028 है. वहीं एक साल के भीतर दायर मामलों की संख्या 60207 है. इनमें अकेले रिट की संख्या 73186 है. वरिष्ठ नागरिकों द्वारा दायर किये गये मामलों की संख्या 26311 है, जबकि महिलाओं द्वारा 16030 याचिकाएं दायर की गयी हैं.

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जिला अदालतों में लंबित मुकदमो की संख्या 34 लाख से ज्यादा

इसी प्रकार जिला अदालतों में कुल 34 लाख 49 हजार लंबित मुकदमों में क्रिमिनल केस की संख्या 29,34,233 है. वहीं सिविल मामलों की संख्या पांच लाख 15 हजार से अधिक है. अकेले पटना जिले में चार लाख 45 हजार से अधिक मुकदमे सुनवाई के लिए रजिस्टर्ड हैं. इसमें तीन लाख 93 हजार क्रिमिनल और 52 हजार से अधिक सिविल मामले हैं. जिला अदालतों में 30 साल से अधिक समय से चल रहे मुकदमों की संख्या 12694 है. जबकि 20 से 30 साल से चल रहे मामलों की संख्या 88126, 10 से 20 साल से लंबित मुकदमों की संख्या 54,5537 है. पांच से 10 साल तक से लंबित मुकदमों की संख्या नौ लाख 54,694 है.

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