बिहार : गंडक बराज के ध्वस्त गेट नंबर 33 की अभी तक मरम्मत नहीं, गांवों में बढ़ रहा है पानी

पश्चिम चंपारण : वाल्मीकि नगर गंडक बराज के 33 नंबर के गेट के टूटने के बाद उसकी मरम्मती को लेकर पहले से ही इंजीनियरों ने अपने हाथ खड़े कर दिये हैं. उधर बराज के टूटने की खबर के बाद जल संसाधन विभाग की टीम वाल्मीकिनगर बराज पहुंची. टीम ने गेट की स्थिति को देखते हुए […]
पश्चिम चंपारण : वाल्मीकि नगर गंडक बराज के 33 नंबर के गेट के टूटने के बाद उसकी मरम्मती को लेकर पहले से ही इंजीनियरों ने अपने हाथ खड़े कर दिये हैं. उधर बराज के टूटने की खबर के बाद जल संसाधन विभाग की टीम वाल्मीकिनगर बराज पहुंची. टीम ने गेट की स्थिति को देखते हुए नया गेट लगाने का प्रस्ताव दे दिया है. जांच करने गयी टीम के विशेषज्ञ अभियंताओं ने बताया कि गेट नंबर 33 पूरी तरह बेकार हो गया है. गंडक में उफान को देखते हुए फाटक को बदल पाना संभव नहीं है. उधर मरम्मती नहीं होने की वजह से लगातार गांवों में पानी बढ़ता जा रहा है. लोगों में दहशत का आलम है.
इससे पूर्व जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने मामले की जांच की बात कही थी. गेट टूटने की वजह से दर्जनों गांवों में पानी घुस गया है. बताया जा रहा है कि बराज के गेट नंबर 33 के ध्वस्त हो जाने के बाद उसके नये खरीदे जाने की योजना है. 1964 में बने इस बराज के फाटक टूटने के बाद बगहा सहित आस-पास के गांवों के लोग रातजगा कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन की ओर से एफआईआर दर्ज किया गया है. हालांकि जल संसाधन विभाग के अभियंता पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं. लेकिन बैराज के गेट के मरम्मती की संभावना कम बतायी जा रही है.
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