राजपुर के कई स्कूलों में पेयजल संकट गहराया, स्कूल प्रबंधन ने वैकल्पिक जलापूर्ति की मांग की

Author Kamal pankaj|Edited by Rajeev Kumar
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खीरी स्कूल में पानी के लिए चापाकल पर छात्रों की लगी भींड़ | Prabhat Khabar Network

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राजपुर के स्कूलों में गिरते जलस्तर के कारण पानी का संकट गहरा गया है. उमस भरी गर्मी में बच्चे बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, प्रशासन से मदद की गुहार लगाई गई है.

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Buxuar News : राजपुर प्रखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी और उमसभरे मौसम के बीच सरकारी स्कूलों में पेयजल संकट गहरा गया है. हालात ऐसे हैं कि बच्चों के लिए पढ़ाई करना तो दूर, स्कूल परिसर में रुकना भी मुश्किल हो गया है. लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण अधिकांश चापाकल और समरसेबल पंप पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्यास से परेशान हैं.

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नागपुर और मंगरॉव स्कूलों में पानी की भारी किल्लत

मध्य विद्यालय एवं उच्च विद्यालय नागपुर तथा मध्य विद्यालय एवं उच्च विद्यालय मंगरॉव की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बतायी जा रही है. नागपुर में करीब 850 और मंगरॉव में लगभग 750 बच्चे पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन उन्हें पीने का पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है. इसके अलावा खीरी उच्च विद्यालय, कजरिया सहित अन्य स्कूलों में भी जलस्तर गिरने से पेयजल संकट गहरा गया है.

विभाग को सूचना देने के बाद भी नहीं हुआ समाधान

प्रधानाध्यापक पंकज पाण्डेय, सुरेंद्र सिंह तथा खीरी उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक जितेंद्र ज्वाला ने बताया कि स्कूलों के चापाकल पूरी तरह जवाब दे चुके हैं. समरसेबल पंप से भी नाममात्र का पानी निकल रहा है. उन्होंने बताया कि विभाग को इसकी लिखित सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है. स्थिति यह है कि कुछ देर तक पंप बंद रहने के बाद पाइप से पानी की जगह केवल कुछ बूंदें ही निकलती हैं.

बेलगाम भूजल दोहन से बढ़ी समस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों और आसपास के क्षेत्रों में चौबीसों घंटे समरसेबल पंप चलने से भूजल स्तर तेजी से नीचे चला गया है. इसके कारण स्कूलों के साथ-साथ ग्रामीणों के घरों के चापाकल भी सूखने लगे हैं. कई स्थानों पर नल-जल योजना से कुछ राहत मिल रही है, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं है.

प्रशासन से टैंकर के जरिए पानी उपलब्ध कराने की मांग

स्कूल प्रबंधन और ग्रामीणों का कहना है कि उमसभरी गर्मी में बिना पेयजल के बच्चों का स्कूल में बैठना बेहद कठिन हो गया है. प्यास के कारण बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लग पा रहा है. लोगों ने प्रशासन से तत्काल टैंकर या अन्य वैकल्पिक माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं की गयी तो किसी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता और स्कूलों में पठन-पाठन भी प्रभावित हो सकता है.


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