आचार्य अनिल पाण्डेय ने कहा-जीव का परमात्मा से मिलना ही महारस है, राजपुर में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ भव्य समापन
कथावाचन करते आचार्य अनिल | Prabhat Khabar Network
बक्सर के राजपुर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन. आचार्य अनिल पाण्डेय ने बताया जीव व परमात्मा के मिलन का महत्व. जानिए क्या है महारस.
Buxar News : राजपुर प्रखंड के मंगरॉव पंचायत के रौनी स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ का समापन श्रद्धा और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ. इस ज्ञान यज्ञ का आयोजन बैकुंठवासी श्री महन्त राम शोभा दास जी महाराज के कृपा पात्र महन्त श्री अनुग्रह नारायण दास जी महाराज के तत्त्वावधान में किया गया.
बक्सर की अन्य खबरें यहां क्लिक कर पढ़ें.
कथा वाचक आचार्य श्री अनिल पाण्डेय जी ने अपने मुखारविंद से श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसास्वादन कराया. कथा के अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य अनिल पाण्डेय जी ने रास पंचाध्यायी व भागवत माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि जीव का परमात्मा से मिलना ही महारस है. 'रसानाम समूह इति रास' अर्थात जीव को ब्रह्म का सारा सुख जिस भक्ति व प्रसंग में मिले, उसे हम रास कहते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि भगवान शुकदेव महाराज के अनुसार, जो व्यक्ति इस पावन प्रसंग को सुनता है और उस पर चिंतन-मनन करता है, उसे एक दिन भगवान की प्राप्ति अवश्य होती है. इसलिए प्रत्येक मानव को भागवत कथा का रसपान करना चाहिए.
कथा महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए आचार्य जी ने कहा कि जो मानव श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से वंचित रह गया, वह मृत्यु के समान जीवन जीता है. ऐसा स्वयं देवराज इंद्र भी स्वीकार करते हैं.
सात दिनों तक चले इस ज्ञान महायज्ञ में संपूर्ण रौनी गांव व आसपास के क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना रहा. समापन के अवसर पर विधि-विधान से हवन-पूजन के बाद विशाल भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें समस्त ग्रामवासियों व क्षेत्रवासियों ने भाग लेकर पुण्य लाभ कमाया.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए