राजपुर का खीरी स्कूल बना मिसाल, योग-अनुशासन और इको क्लब से बदल रही बक्सर की तस्वीर

Author Kamal pankaj|Edited by Ragini Sharma
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फोटो :- स्कूल में योगाभ्यास करते बच्चें | Prabhat Khabar Network

छात्रों की तस्वीर

राजपुर प्रखंड का खीरी प्राथमिक उर्दू विद्यालय अब पढ़ाई के साथ-साथ योग, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण का केंद्र बन गया है। चेतना सत्र और इको क्लब के माध्यम से बच्चे जीवन के हर पहलू को सीख रहे हैं।

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Buxar News : राजपुर प्रखंड का खीरी प्राथमिक उर्दू विद्यालय अब सिर्फ एक साधारण सरकारी स्कूल नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे इलाके में एक नई पहचान बना चुका है. कभी पढ़ाई के मामले में पिछड़ा माना जाने वाला यह विद्यालय आज नवाचार, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उदाहरण बनकर सामने आ रहा है. यहां के बच्चे अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन के हर पहलू को समझते हुए आगे बढ़ रहे हैं.

विद्यालय में हर दिन की शुरुआत अब एक खास तरीके से होती है. सुबह स्कूल पहुंचते ही बच्चे पूरी यूनिफॉर्म में अनुशासित होकर चेतना सत्र में शामिल होते हैं. इस दौरान प्रभात फेरी, प्रार्थना सभा और योगाभ्यास कराया जाता है. योग करते बच्चों का उत्साह साफ दिखता है और यही अभ्यास उनके जीवन में अनुशासन और स्वास्थ्य दोनों को मजबूत कर रहा है.

चेतना सत्र ने बदली स्कूल की पहचान

पहले जहां स्कूल की दिनचर्या सामान्य थी, वहीं अब चेतना सत्र ने इसे एक नई दिशा दी है. बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि नैतिक शिक्षा भी दी जा रही है. शिक्षकों द्वारा महान विचारकों और राष्ट्रनिर्माताओं की कहानियां सुनाई जाती हैं, जिससे बच्चों के अंदर अच्छे संस्कार विकसित हो रहे हैं. यह बदलाव धीरे-धीरे बच्चों के व्यवहार में भी नजर आने लगा है.

प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्रा और उनकी टीम इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है. उनके प्रयासों से स्कूल का माहौल पूरी तरह बदल गया है. अब बच्चे समय पर आते हैं, पढ़ाई में रुचि लेते हैं और गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

इको क्लब से पर्यावरण की ओर बढ़ते कदम

विद्यालय का इको क्लब भी काफी चर्चा में है. इसके जरिए बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है. बच्चे खुद पौधे लगाते हैं और अपने घरों में भी लोगों को इसके लिए प्रेरित करते हैं. यही वजह है कि अब गांव में हरियाली बढ़ने लगी है.

बच्चों की इस पहल का असर इतना हुआ है कि ग्रामीण भी इससे जुड़ने लगे हैं. लोग अपने स्तर पर पौधारोपण कर रहे हैं और बच्चों के प्रयास की सराहना कर रहे हैं. स्कूल से शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे गांव में फैल चुका है.

पढ़ाई के साथ समाज को भी दे रहे दिशा

यहां के छात्र सिर्फ खुद पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि दूसरे बच्चों को भी स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. वे अपने आसपास के बच्चों को शिक्षा का महत्व समझा रहे हैं. इससे गांव में शिक्षा का माहौल भी बेहतर हुआ है.

शिक्षकों का मानना है कि जब शिक्षा को समाज और प्रकृति से जोड़ा जाता है, तब उसका असर ज्यादा गहरा होता है. यही कारण है कि अब इस स्कूल के बच्चे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं.


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