बक्सर में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सजी साहित्य की महफिल, कविताओं के जरिए भाषा और नई पीढ़ी पर हुई चर्चा
बिस्मिल्लाह खां संगीत एकेडमी में कवि गोष्ठी में कविता पाठ करते कवि | Prabhat Khabar Network
Buxar News : डुमरांव में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कवि गोष्ठी में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा न मिलने पर चिंता जताई गई. रोजगार की होड़ में नई पीढ़ी के साहित्य से दूर होने पर भी चर्चा हुई. कवियों की रचनाओं ने समां बांधा.
Buxar News : डुमरांव में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रगतिशील लेखक संघ, बक्सर के तत्वावधान में हरि जी के हाता स्थित बिस्मिल्लाह खां संगीत एकेडमी में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता चर्चित कवयित्री सह शिक्षिका मीरा सिंह 'मीरा' ने की, जबकि संचालन प्रलेस के जिलाध्यक्ष डॉ. बीएल प्रवीण ने किया.
हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिलने पर जताई चिंता
गोष्ठी के दौरान हिंदी को अब तक राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिलने पर चिंता जताई गई. डॉ. बीएल प्रवीण ने कहा कि सत्तर के दशक में हिंदी को लेकर दक्षिण भारत में विरोध इतना तीखा था कि संविधान की प्रतियां तक जला दी गई थीं. उन्होंने अपने द्वारा लिए गए एक साक्षात्कार का हवाला देते हुए बताया कि साहित्यकार जैनेन्द्र कुमार ने हिंदी के विकास में आंचलिक भाषाओं को बाधक माना था. उनके अनुसार, भाषा की एकरूपता उसकी व्यापक स्वीकार्यता में अहम भूमिका निभाती है.
रोजगार की होड़ में साहित्य से दूर हो रही नई पीढ़ी
एक्सपोर्ट व्यवसाय से जुड़े रोहित रहस्य ने कहा कि रोजगार की होड़ में नई पीढ़ी साहित्य और कला से दूर होती जा रही है. उन्होंने शिक्षा में कला संकाय को उचित महत्व देने की जरूरत बताई. सेवानिवृत्त प्राचार्या पुष्पा कुमारी ने विद्यालय स्तर पर साहित्य और कला से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित करने पर जोर दिया.
कविताओं ने बांधा समां, 'बात समझना' को मिली सराहना
गोष्ठी में रामयश सिंह, रोहित राय, मीरा सिंह 'मीरा', खुर्शीद आलम और डॉ. बीएल प्रवीण ने कविता पाठ किया. मीरा सिंह 'मीरा' की कविता 'बात समझना' को विशेष सराहना मिली. कवियों की रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया.
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साहित्यप्रेमियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त डीएसपी लालधारी प्रसाद, भृगुनाथ यादव, प्रियरंजन राय, सुमन और डॉ. विश्वनाथ सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे. उपस्थित लोगों ने साहित्य और हिंदी भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया.
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