यूपी-बिहार सीमा पर दिखेगी बक्सर की ऐतिहासिक विरासत, भित्तिचित्रों से सज रहा प्रवेश द्वार

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आकर्षक पेंटिंग करते कारीगर | Prabhat Khabar Network

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Buxar News : बक्सर के प्रवेश द्वार को रामायण और बक्सर युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक भित्तिचित्रों से सजाया जा रहा है. ये पेंटिंग पर्यटकों को आकर्षित करेंगी और नई पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास से जोड़ेंगी.

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Buxar News : वीर कुंवर सिंह गंगा सेतु पार कर उत्तर प्रदेश से जैसे ही बिहार की सीमा में प्रवेश करेंगे, बक्सर के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक लोगों को देखने को मिलेगी. यूपी-बिहार सीमा पर स्थित मुख्य प्रवेश द्वार के समीप बने पार्क की दीवारों को आकर्षक और ऐतिहासिक स्वरूप दिया जा रहा है. बक्सर नगर परिषद की पहल पर यहां दीवारों पर भव्य वॉल पेंटिंग और भित्तिचित्र बनाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. इस कार्य की जिम्मेदारी मोनालिसा प्रशिक्षण एवं कल्याण केंद्र को सौंपी गयी है.

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रामायण काल के प्रसंगों को रंगों के माध्यम से उकेरा जा रहा

संस्था के कलाकार दीवारों पर रंगों के माध्यम से बक्सर की पौराणिक और ऐतिहासिक कथाओं को जीवंत रूप दे रहे हैं. भित्तिचित्रों की थीम पूरी तरह बक्सर की पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित रखी गयी है. दीवारों पर रामायण काल के प्रमुख प्रसंगों को चित्रित किया जा रहा है. इनमें महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, जहां भगवान राम और लक्ष्मण ने शिक्षा ग्रहण की थी, अहिल्या उद्धार और ताड़का वध के प्रसंग प्रमुख हैं.

रामरेखा घाट से लेकर बक्सर युद्ध तक की झलक

भित्तिचित्रों में बक्सर के प्रसिद्ध रामरेखा घाट पर भगवान राम के चरण चिह्नों का चित्रण भी किया जा रहा है. इसके साथ ही जिले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाने के लिए वर्ष 1764 में हुए प्रसिद्ध बक्सर युद्ध सहित अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को भी चित्रों के माध्यम से जीवंत किया जा रहा है. इन चित्रों के जरिए लोगों को बक्सर के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है.

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पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ नयी पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की पहल

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से शहर के प्रवेश द्वार की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. यूपी से बिहार में प्रवेश करते ही लोगों को बक्सर की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान की झलक मिलेगी. साथ ही भित्तिचित्रों के माध्यम से नयी पीढ़ी को अपने पुरातन और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने में मदद मिलेगी. इससे बक्सर में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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पहले भी शहर की दीवारों को चित्रों से सजाया गया

यह पहला मौका नहीं है, जब मोनालिसा प्रशिक्षण एवं कल्याण केंद्र के माध्यम से शहर को सजाने और संवारने का काम किया जा रहा है. इससे पहले समाहरणालय स्थित तालाब की दीवारों और रामरेखा घाट स्थित लाइट एंड साउंड प्रसारण केंद्र की दीवारों पर भी आकर्षक पेंटिंग करायी जा चुकी है. अब यूपी-बिहार सीमा पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चित्रों से सजायी जा रही दीवारें बक्सर की नयी पहचान के रूप में उभरने की दिशा में एक और पहल है.

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