डुमरांव अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, तीन नवजातों की हालत बिगड़ने से उठे सवाल

Published by : Suryakant Kumar Updated At : 08 Jun 2026 7:28 PM

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नवजात को सीपीआर देते डॉक्टर

Buxar News: बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल के मातृ एवं शिशु नवजात देखभाल केंद्र (एमएनसीयू) में शिशु रोग विशेषज्ञों की भारी कमी के कारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. वर्तमान में यहां केवल एक चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार की तैनाती है, जो सप्ताह में केवल दो दिन सेवा देते हैं. सोमवार को डॉक्टरों की तत्परता और सीपीआर देने से तीन गंभीर नवजातों की जान तो बच गई, लेकिन स्थानीय लोगों ने अस्पताल में नियमित शिशु रोग विशेषज्ञ की स्थाई नियुक्ति की मांग उठाई है.

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Buxar News: (डुमरांव से सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट )
डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल का मातृ एवं शिशु नवजात देखभाल केंद्र (एमएनसीयू) नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी सुविधा साबित हो रहा है, लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञों की भारी कमी इसके प्रभाव को सीमित कर रही है. वर्तमान में यहां केवल एक चिकित्सक डॉ. अभिषेक कुमार की तैनाती है, जिनकी ड्यूटी सप्ताह में केवल सोमवार और शुक्रवार को रहती है. शेष दिनों में वे सिमरी सीएचसी में सेवाएं देते हैं. उनके साथ जीएनएम शोभा कुमारी की भी ड्यूटी लगाई जाती है.

तीन नवजातों की अचानक बिगड़ी हालत, डॉक्टरों की तत्परता और सीपीआर से बची जान

सोमवार को एमएनसीयू वार्ड में तीन नवजात शिशुओं को भर्ती कराया गया था. इनमें दो जुड़वां बच्चे रविवार देर रात करीब दो बजे जन्मे थे, जबकि तीसरे बच्चे का जन्म सोमवार सुबह छह बजे हुआ था. भर्ती के कुछ समय बाद ही तीनों बच्चों की स्थिति गंभीर होने लगी. डॉ. अभिषेक कुमार लगातार उपचार में जुटे रहे, लेकिन इसी दौरान एक बच्चे की हालत अत्यंत नाजुक हो गई और उसकी धड़कन धीमी पड़ने लगी. स्थिति की गंभीरता की सूचना मिलते ही अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. प्रेमा कुमारी तत्काल एमएनसीयू पहुंचीं. उस समय डॉ. अभिषेक बच्चे को सीपीआर दे रहे थे.

डॉ. प्रेमा कुमारी ने भी माउथ-टू-माउथ रेस्पिरेशन देकर उपचार में सहयोग किया. डॉक्टरों के संयुक्त प्रयास से कुछ देर बाद बच्चे की धड़कन सामान्य हुई और वह रोने लगा. इसके बाद भी उसका इलाज जारी रखा गया.

प्रतिदिन औसतन 10 से 15 बच्चों का जन्म

अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 10 से 15 नवजात शिशुओं का जन्म होता है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि सोमवार और शुक्रवार के अलावा किसी अन्य दिन या रात में किसी नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. करोड़ों रुपये की लागत से एमएनसीयू भवन और अत्याधुनिक मशीनें तो उपलब्ध करा दी गई हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त नियुक्ति नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल नियमित शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की मांग की है.

डॉक्टरों की उपलब्धता होने पर ही संभव होगी अतिरिक्त नियुक्ति: सिविल सर्जन

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद चक्रवर्ती ने कहा कि डुमरांव का एमएनसीयू पहले पूरी तरह बंद रहता था. काफी प्रयास के बाद एक चिकित्सक की तैनाती कर सप्ताह में दो दिन सेवा शुरू कराई गई है. उन्होंने बताया कि एक अन्य चिकित्सक डॉ. आरबी प्रसाद ने अब तक योगदान नहीं दिया है. सिविल सर्जन ने कहा कि चिकित्सकों की उपलब्धता होने पर ही अतिरिक्त नियुक्ति संभव हो सकेगी. फिलहाल सप्ताह में दो दिन सेवा संचालित होना भी पहले की तुलना में बेहतर स्थिति है.

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लेखक के बारे में

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सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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