Land Survey: बक्सर में 187 मौजों का भूमि सर्वे संकट में, खतियान गायब होने से अटका काम, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

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बक्सर जिले से चिंताजनक खबर सामने आई है जहाँ 187 राजस्व मौजों के कैडस्ट्रल सर्वे खतियान गायब हैं या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. यह भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण और विशेष भूमि सर्वे अभियान के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर रहा है.
Land Survey: बिहार सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण और विशेष भूमि सर्वे अभियान के बीच बक्सर जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है. जिले के ब्रह्मपुर अंचल समेत कुल 187 राजस्व मौजों के कैडस्ट्रल सर्वे खतियान या तो सरकारी अभिलेखागारों से गायब हैं या फिर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. प्रशासन ने आम नागरिकों, किसानों और भू-स्वामियों से अपील की है कि यदि उनके पास पुराने खतियान की प्रति उपलब्ध हो तो वे इसे अंचल कार्यालय या जिला अभिलेखागार में जमा कराएं. लेकिन इस घोषणा के बाद से ही क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों के बीच गहरी चिंता फैल गई है. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ग्रामीणों या किसानों के पास भी यह कैडस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं हुआ, तो भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और जारी विशेष सर्वे का क्या होगा.
Buxar News : यदि ग्रामीणों के पास भी खतियान न मिले
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के जानकारों और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी मौजे का खतियान न तो अंचल/जिला अभिलेखागार में मिले और न ही ग्रामीणों के पास हो, तो इसके गंभीर परिणाम और प्रशासनिक अड़चनें पैदा होंगी.
Land Mutation :म्यूटेशन और बंटवारा पूरी तरह ठप
खतियान ही किसी भूमि के मूल मालिकाना हक का प्राथमिक दस्तावेज होता है. इसके अभाव में जमीनों का नामांतरण पारिवारिक बंटवारा और वरासत दर्ज करने की कानूनी प्रक्रिया अटक जाएगी.
Land Record: विशेष भूमि सर्वे में अड़चन
सरकार की योजना सभी भू-अभिलेखों को ऑनलाइन पोर्टल (''भू-अभिलेख पोर्टल'') पर अपलोड करने की है। आधारभूत डेटा न होने के कारण अमीन और राजस्व कर्मचारी नए सर्वे में नक्शे और खतियान का मिलान नहीं कर पाएंगे.
अदालती मामले और मुआवजे पर असर
भविष्य में होने वाले भूमि अधिग्रहण के समय मुआवजा मिलने में देरी होगी, साथ ही अदालतों में लंबित जमीन संबंधी मुकदमों का निपटारा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा.
प्रभावित क्षेत्र और दियारा की विशेष चुनौती
ब्रह्मपुर अंचल के अंतर्गत आने वाले दियारा और सीमावर्ती क्षेत्र इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.प्रमुख प्रभावित मौजे जिनमें नैनीजोर, देवकुली, महाराजगंज, जगदीशपुर, बघउच, सुघर छपरा, धुंध छपरा.
तटीय व नौवार क्षेत्र
नन्दपुर नौवार, बरैयां नौवार, बलुआ नौवार, दल्लुपुर नौवार, परनही नवार, चटनी नौवार, विदुरी नौवार, सपही नौवार.
अन्य प्रभावित राजस्व ग्राम
चमरिया किला, चमरिया खुर्द, नन्दपुर, बभनी, धरौली, पिडारी, विशंभर, पिडाडीचक, भदवर, उधुरा, गुरुहपुर, दल्लुपुर, परनही, कादरपुर, विशुनपुर, विशुनपुर मिल्की, कदरदही, वसुधरपात और रूपापाली शामिल हैं.दियारा इलाकों में कटाव और हर साल आने वाली बाढ़ के कारण अधिकांश किसानों के कागजात पहले ही नष्ट हो चुके हैं. ऐसे में ग्रामीणों से खतियान की प्रति मिलना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
प्रशासनिक व कानूनी विकल्प: आगे का रास्ता क्या है
यदि ग्रामीणों के पास से भी कैडस्ट्रल खतियान की प्रति प्राप्त नहीं होती है, तो राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को निम्नलिखित वैकल्पिक और विशेष प्रक्रियाओं का सहारा लेना होगा पटना स्थित केंद्रीय अभिलेखागार से जिला और अंचल स्तर पर रिकॉर्ड न मिलने की स्थिति में बिहार राज्य अभिलेखागार से पुराने कैडस्ट्रल सर्वे (1888-1915 के दौरान हुए सर्वे) के मूल रिकॉर्ड खोजकर मंगाने होंगे.
द्वितीयक दस्तावेजों का सहारा
अंचल कार्यालय में उपलब्ध रजिस्टर-2 के आधार पर जमाबंदी की पड़ताल की जाएगी. किसानों द्वारा कटाई गई पुरानी लगान रसीदें, जमींदारी रिटर्न और जमीन की रजिस्ट्री के कागजात (केवाला) को साक्ष्य माना जाएगा.
स्थल निरीक्षण और पंचनामा
अमीन, राजस्व कर्मचारी और अंचलाधिकारी की टीम गांव का दौरा करेगी. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मुखिया, बुजुर्गों और चौहद्दीदार (पड़ोसी जमीन मालिकों) की मौजूदगी में मौके पर जमीन के कब्जे और सीमांकन का पंचनामा तैयार किया जाएगा. यदि किसी मौजे का रिकॉर्ड पूरी तरह शून्य हो जाता है, तो राज्य सरकार को उस विशिष्ट मौजे के लिए विशेष सर्वे का अलग आदेश जारी करना होगा, जिसके तहत नए सिरे से पूरे मौजे की पैमाइश कर नया खतियान तैयार किया जाएगा.
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