बिहार में 903 करोड़ की लागत से पावर प्लांट के लिए बनाया जाएगा रेल कॉरिडोर, जानिए क्या है पूरा प्रोजेक्ट
रेल कॉरिडोर (सांकेतिक तस्वीर)
Bihar New Rail Corridor: बक्सर जिले के 1,320 मेगावाट पावर प्लांट को अब रेल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा. यह परियोजना 903.01 करोड़ रुपये की बताई जा रही है. इस प्रोजेक्ट के जरिए बिहार को करीब 1,120 मेगावाट बिजली मिल सकेगी.
Bihar New Rail Corridor: बिहार के बक्सर में चौसा में 1,320 मेगावाट के ताप बिजली घर को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने की प्लानिंग है. इस प्रोजेक्ट पर 903.01 करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे. इस प्रोजेक्ट का सिर्फ पावर प्लांट तक रेल पहुंचाना नहीं, बल्कि कोयले की सप्लाई को लगातार बनाए रखना है. परियोजना का काम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) करेगी. इसे पूरा करने के लिए 36 महीने यानी तीन साल की समय-सीमा तय की गई है.
सीधे प्लांट के अंदर पहुंचेगी कोयले की रेक
नई व्यवस्था तैयार होने के बाद सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड की खदानों से आने वाली कोयले की रेक सीधे पावर प्लांट की अपनी रेलवे साइडिंग तक पहुंच सकेंगी. इसके लिए चौसा रेलवे स्टेशन और पवनी कमरपुर हॉल्ट के पास से मौजूदा रेल लाइन को प्लांट परिसर से जोड़ा जाएगा.
परियोजना में स्थायी रेलवे साइडिंग और एलिवेटेड रेल ट्रैक बनाया जाएगा. खास बात यह है कि एलिवेटेड ट्रैक के कारण कम जमीन का इस्तेमाल होगा और स्थानीय आबादी पर भी इसका असर कम रखने की कोशिश की जाएगी.
सालाना 62.5 लाख टन कोयले की जरूरत
रेल कनेक्शन तैयार होने के बाद प्लांट को हर साल करीब 6.25 मिलियन टन यानी 62.5 लाख टन कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. कोयले की सप्लाई जितनी नियमित होगी, बिजली उत्पादन भी उतना ही स्थिर रखा जा सकेगा. इस प्लांट से एक साल में करीब 9,828 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है. इसमें से लगभग 85 प्रतिशत यानी 1,120 मेगावाट बिजली बिहार को मिलेगी.
तीसरी यूनिट से बढ़ेगी क्षमता
जानकारी के मुताबिक, बक्सर पावर प्लांट की यहां 660-660 मेगावाट की दो यूनिट हैं. पहली यूनिट व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी है, जबकि दूसरी यूनिट ने 31 अगस्त 2026 को लगातार 72 घंटे तक पूरी क्षमता पर परीक्षण पूरा किया. अब 800 मेगावाट की तीसरी यूनिट लगाने की तैयारी भी चल रही है. इसके बाद प्लांट की कुल क्षमता 2,120 मेगावाट तक पहुंच जाएगी
इस तरह से बक्सर में बन रही यह रेल लाइन सिर्फ पटरियों का नेटवर्क नहीं है. बल्कि यह उस व्यवस्था की अहम कड़ी है, जिसके जरिए कोयला सीधे प्लांट तक पहुंचेगा और वहां से पैदा होने वाली बिजली बिहार के घरों, खेतों और उद्योगों तक पहुंच सकेगा.
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