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दीपों और खुशियों का पर्व दीपावली 20 अक्टूबर को

Updated at : 11 Oct 2025 9:33 PM (IST)
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दीपों और खुशियों का पर्व दीपावली 20 अक्टूबर को

आस्था, आनंद और प्रकाश का अद्भुत संगम दीपावली का पर्व इस वर्ष 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

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बिहारशरीफ. आस्था, आनंद और प्रकाश का अद्भुत संगम दीपावली का पर्व इस वर्ष 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. सनातन धर्मावलंबियों के लिए यह सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की आराधना तथा दीपों के आलोक से सजे दीपोत्सव के रूप में मनाया जाता है. कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात जब असंख्य दीपक प्रज्ज्वलित होते हैं, तब हर ओर उजाला और उमंग का वातावरण फैल जाता है. पंडित श्रीकांत शर्मा आचार्य के अनुसार इस वर्ष अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 2:32 बजे प्रारंभ होकर पूरी रात्रि तक रहेगी. ऐसे में दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर की रात में ही मनाना शास्त्रसम्मत और फलदायी रहेगा. इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त :-

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार दीपावली की पूजा प्रदोषकाल और निशीथकाल में करना सबसे शुभ माना गया है. प्रदोषकाल शाम 5:57 बजे से रात 8:27 बजे तक है. वृषभ काल शाम 7:23 से रात 9:22 बजे तक जबकि निशीथ पूजा का मुहूर्त रात्रि 11:47 बजे से 12:36 बजे तक है. इन्हीं समयों में लक्ष्मी पूजन करने से मां लक्ष्मी की कृपा स्थायी रूप से बनी रहती है.

तीन ग्रहों का शुभ महासंयोग:-

इस बार दीपावली पर तीन ग्रह मंगल, सूर्य और बुध का अद्भुत संयोग बन रहा है. ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीकांत शर्मा के अनुसार यह त्रिग्रही योग सभी राशियों के लिए शुभ फल देने वाला सिद्ध होगा. इस दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी के साथ इंद्रदेव, कुबेर और महाकाली की उपासना करने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सफलता का संचार होगा. दीपावली के दिन सिंह, वृषभ और कुंभ लग्न में पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि यह “स्थिर लग्न” हैं. जो लक्ष्मी की स्थायी कृपा का प्रतीक हैं.

भगवान राम के अयोध्या लौटने की स्मृति:-

दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की पावन स्मृति से भी जुड़ा है. पौराणिक मान्यता है कि 14 वर्ष के वनवास और रावण वध के बाद जब श्रीराम माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने दीपों से संपूर्ण अयोध्या को आलोकित कर उनका स्वागत किया था. उसी हर्षोल्लास और प्रकाश की परंपरा आज भी दीपावली के रूप में जीवित है.

हर ओर जगमगाएगी खुशियों की रोशनी:-

शहर के बाजारों में इस समय उत्सव की रौनक दिखाई देने लगी है. घरों और दुकानों को रंग-बिरंगी लाइटों, झालरों और दीपों से सजाया जा रहा है. मिठाइयों, उपहारों और पूजा-सामग्री की खरीददारी ने बाजारों में नई चमक भर दी है. इस वर्ष दीपावली न केवल दीपों का उत्सव होगी, बल्कि ग्रहों के अद्भुत संयोग से यह सभी के जीवन में नई ऊर्जा, रोशनी तथा मंगलकामनाएं लेकर आएगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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