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बदलाव हुए कानून को लेकर हिलसा के अधिवक्ताओं में आक्रोश

शनिवार को हिलसा अधिवक्ता संघ कैम्पस में अधिवक्ताओं का एक बैठक आयोजित की गयी बैठक की. अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष सतीश प्रसाद सिन्हा एवं संचालन सचिव युगल यादव ने किया.

हिलसा.

शनिवार को हिलसा अधिवक्ता संघ कैम्पस में अधिवक्ताओं का एक बैठक आयोजित की गयी बैठक की. अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष सतीश प्रसाद सिन्हा एवं संचालन सचिव युगल यादव ने किया. बैठक को संबोधित करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार के द्वारा नियमों में बदलाव किया गया है. जिसमें बार काउंसिल में तीन सदस्य केंद्रीय सरकार के द्वारा नामित होंगे, अव कोई अधिवक्ता हड़ताल नहीं कर सकेगे, ना ही किसी न्यायालय का बहिष्कार करेगा, यदि किसी अधिवक्ता को किसी अपराध में तीन साल या उससे ज्यादा सजा हो जाती है तो उसे एडवोकेट रोल लिफ्ट से हटा दिया जाएगा. अब केंद्रीय सरकार विदेशी लां फार्म को भारत में वकालत का कार्य करने के लिए अनुमति लेने की नियम बना सकेगी. समेत विभिन्न बदलाव किया गया है जिसका विरोध हिलसा की अधिवक्ता में देखने को मिला है. सर्व सहमति से यह निर्णय लिया गया है. 24 फरवरी दिन सोमवार हिलसा अधिवक्ता संघ के अधिवक्ता अपने हाथ पर काला पट्टी बांधकर सुचारू रूप से काम करेंगे जबकि 25 फरवरी मंगलवार को सभी अधिवक्ता अपने हाथ पर काला पट्टी बांधते हुए सभी न्यायिक के काम को अपने से दूर रखेंगे. बैठक में इंद्रजीत चक्रवर्ती, प्रकाश कुमार, महेश कुमार, आर्यन आर्क, रानी प्रियंका कुमारी, मितेंद्र कुमार, प्रवीण कुमार, दिलीप कुमार, दिनेश कुमार, भानु कुमार, रवि शंकर कुमार, संजय सिंह, अनिल कुमार, कृष्ण कुमार, नागेंद्र कुमार, राजेश कुमार, बालमुकुंद कुमार, सच्चिदानंद सिन्हा, पंकज कुमार, उमेश राम, स्वामी सहजानंद, शिव कुमार, सुरेंद्र यादव इत्यादि शामिल थे.वकीलों के संवैधानिक अधिकार पर सीधा प्रहारऑल इंडिया लॉयर्स एशोसिएशन फॉर जस्टिस के रास्ट्रीय पार्षद अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 में चिन्ताजनक संशोधन प्रस्तावित किए है. जिसे अधिवक्ता संशोधन अधिनियम 2025 से जाना जायगा. प्रस्तावित अधिनियम अधिवक्ताओं के स्वतंत्रता और अधिकारों पर प्रहार है. इस अधिनियम में निम्न प्रावधान अधिवक्ता के हितों के प्रतिकूल है. प्रस्तावित धारा 4 के तहत वार काउंसिल में केन्द्र सरकार का हस्तक्षेप, अधिवक्ता व पीठासीन अधिकारी से विवाद होने पर, प्रोटेस्ट करने पर प्रतिबंध धारा 35 ए, यदि अधिवक्ता प्रोटेस्ट करेंगे तो प्रशासनिक करवाई करते हुए निलंबन, और प्रस्तावित धारा 9 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश से अधिवक्ता के व्यवहार की जाँच होगी, दोसी पाए जाने पर सजा कि स्थिति में अधिवक्ता लिस्ट से नाम हटा दिया जायेगा धारा 26A, धारा 24 A, एवं 24 B द्रष्टव्य है. धारा 49 A से विदेशी ला फर्मो को भारत में अनुमति. इस प्रकार अधिवक्ता संशोधन अधिनियम 2025 में अनेकों खामियां हैं, जो अधिवक्ता हित मे नही है, केंद्र सरकार के उपर्युक्त संशोधन प्रस्ताव से स्पष्ट होता है कि अधिवक्ता का संबैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार पर प्रहार है.

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Prabhat Khabar News Desk
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