राजगीर में गुरुद्वारा भूमि विवाद पर गरमाई सियासत: अनुराधा देवी ने पेश किए हाईकोर्ट के दस्तावेज; लगाया प्रताड़ना का आरोप

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संकेतिक तस्वीर

Nalanda Rajgir Upadhyay Tola Land Dispute News: राजगीर के उपाध्याय टोला में गुरुद्वारा भूमि विवाद गहरा गया है. एक तरफ अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष सरदार लखविंदर सिंह ने कब्जे का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ राकेश बिहारी उपाध्याय ने पत्नी अनुराधा देवी के मालिकाना हक को लेकर पटना हाईकोर्ट के आदेश और वर्ष 2011 की डीसीएलआर व सीओ की जांच रिपोर्ट के दस्तावेज पेश कर इसे रैयती जमीन बताया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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नालंदा से रामविलास की रिपोर्ट

Nalanda Rajgir Upadhyay Tola Land Dispute News: नालंदा जिले के राजगीर से धार्मिक ट्रस्टों के जमीन के मालिकाना हक के दावों से जुड़ी खबर सामने आई है. स्थानीय राजगीर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उपाध्याय टोला स्थित विवादित जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच दावों के कारण विवाद एक बार फिर गहरा गया है. जहां एक ओर राज्य अल्पसंख्यक आयोग तथा तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के उपाध्यक्ष सरदार लखविंदर सिंह ने गुरुद्वारा की भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर भूमि पर वर्तमान स्वामित्व का दावा करने वाले स्थानीय निवासी राकेश बिहारी उपाध्याय ने उच्च न्यायालय के आदेशों और राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर अपने दावे को शत-प्रतिशत सही बताया है.

सांकेति तस्वीर

2009 में हुआ था जमीन का हस्तांतरण

राकेश बिहारी उपाध्याय ने मीडिया के सामने सबूत पेश किए हैं. राकेश बिहारी उपाध्याय ने बताया कि उक्त विवादित भूमि उन्हें वर्ष 2009 में इंग्लैंड निवासी ज्ञान कुमारी कौर द्वारा विधिवत मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) के माध्यम से प्राप्त हुई थी. इसके बाद उन्होंने नियमानुसार अपनी पत्नी अनुराधा देवी के नाम रजिस्ट्री कराया था.

इसी रजिस्ट्री के आधार पर अंचल कार्यालय, राजगीर द्वारा दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी की गई, और नियमित लगान रसीद तथा एलपीसी (LPC) निर्गत की गई. इसके बाद वर्ष 2010 में इस रैयती भूमि का सरकारी नक्शा भी विभाग द्वारा जारी किया गया था.

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2011 की जांच रिपोर्ट में गुरुद्वारा से संबंध न होने की बात

राकेश उपाध्याय ने दावा किया कि वर्ष 2011 में तत्कालीन भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) एवं अंचलाधिकारी (CO), राजगीर की अलग-अलग जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि विशुद्ध रूप से रैयती प्रकृति की है, जिसका हस्तांतरण 22 मार्च 1959 की वसीयत के आधार पर हुआ था.

जांच के दौरान यह तथ्य भी पाया गया कि इस विवादित भूमि का किसी गुरुद्वारा अथवा किसी अन्य धार्मिक संस्था से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है. तत्कालीन गुरुद्वारा प्रबंधनकर्ता ने भी जांच के समय लिखित रूप से यही जानकारी दी थी कि भूमि पर अनुराधा देवी का कब्जा है और वहां उनका निर्माण कार्य चल रहा है.

पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिका भी हो चुकी है खारिज

सांकेति तस्वीर

पीड़ित परिवार ने बताया कि इसी विवादित मामले में वर्ष 2011 में पटना उच्च न्यायालय में एक सिविल रिट याचिका दायर की गई थी. अंचलाधिकारी द्वारा कोर्ट में जवाब दाखिल किए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपना मामला वापस ले लिया, जिसके बाद 07 जनवरी 2013 को उच्च न्यायालय ने उस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था. राकेश उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से कुछ लोग जानबूझकर निराधार शिकायतें कर उनके पूरे परिवार को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि 3 मई 2025 को राजगीर थाना में आयोजित जनता दरबार में दोनों पक्षों को बुलाया गया था, जहां विपक्षी पक्ष कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. इसके बाद हाल ही में 19 अप्रैल 2026 को उन्हें पुनः अंचलाधिकारी एवं थाना प्रभारी, राजगीर के समक्ष सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया, जहां वे तो सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ आए हुए, लेकिन विपक्षी पक्ष पूरी तरह नदारद रहा. पीड़ित परिवार ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए जिला पदाधिकारी (DM) से मामले में हस्तक्षेप कर निराधार शिकायतों पर रोक लगाने की मांग की है.

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Aditya Kumar Ravi

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By Aditya Kumar Ravi

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