नालंदा : एस.यू. कॉलेज में मनाई गई मुंशी प्रेमचंद की जयंती, वक्ताओं ने उनके साहित्य को बताया समाज का मार्गदर्शक

Updated:
विज्ञापन

मुंशी प्रेमचंद जयंती, साहित्यिक विचारों से गूंजा परिसर | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

एस.यू. कॉलेज, हिलसा में हिंदी विभाग ने मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई. वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने वाला बताया. कार्यक्रम में 'रश्मिरथी' का काव्य पाठ भी हुआ.

विज्ञापन

एस.यू. कॉलेज, हिलसा में शुक्रवार को हिंदी विभाग, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के तत्वावधान में हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई. कार्यक्रम की शुरुआत प्रेमचंद की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करने एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई. मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. बजरंग प्रताप ''हिंद केशरी'', पूर्व विभागाध्यक्ष, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है.

विज्ञापन

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने किसान, मजदूर, स्त्री और दलित समाज की पीड़ा को अपनी रचनाओं में प्रमुखता से स्थान दिया तथा उनके समाधान का भी मार्ग प्रशस्त किया. उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता "आदर्शोन्मुख यथार्थवाद" को बताया. डॉ. हिंद केशरी ने ''पूस की रात'', ''बड़े घर की बेटी'', ''कफन'', ''दो बैलों की कथा'', ''अलगोझा'', ''ठाकुर का कुआं '' और ''ईदगाह'' जैसी कालजयी कहानियों के पात्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पात्र आज भी भारतीय समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं.

प्राचार्य और अन्य वक्ताओं के विचार

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. शिवचंद्र सिंह ने कहा कि प्रेमचंद की तुलना रूस के महान साहित्यकार मैक्सिम गोर्की तथा चीन के प्रसिद्ध कथाकार लुशुन से की जाती है. उन्होंने प्रेमचंद का प्रसिद्ध कथन— "खाने और पीने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है आगे बढ़ते रहने की लगन का"— उद्धृत करते हुए विद्यार्थियों को साहित्य से प्रेरणा लेने का संदेश दिया.

उन्होंने बताया कि प्रेमचंद की लगभग 300 कहानियां ''मानसरोवर'' में संकलित हैं और भारतीय समाज को समझने के लिए उनके साहित्य का अध्ययन आवश्यक है. हिंदी पीजी विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम कुमार ने प्रेमचंद को मानवीय संवेदनाओं का कालजयी साहित्यकार बताते हुए कहा कि शिक्षित व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसकी नम्रता और सेवाभाव है.

कॉलेज के मीडिया प्रभारी एवं साहित्यकार डॉ. राजीव नयन ने प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास ''गोदान'' को भारतीय कृषक जीवन का महाकाव्य बताते हुए कहा कि प्रेमचंद आज भी हिंदी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले साहित्यकार हैं.

''रश्मिरथी'' का काव्य पाठ और छात्राओं की प्रस्तुति

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. बजरंग प्रताप ''हिंद केशरी'' ने रामधारी सिंह ''दिनकर'' की अमर कृति ''रश्मिरथी'' के तृतीय सर्ग का ओजस्वी काव्य पाठ किया, जिसे उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों ने खूब सराहा. इस अवसर पर सेमेस्टर-7 की छात्राओं दिव्या भारती, अनुपम भारती एवं बबली कुमारी ने भी प्रेमचंद के साहित्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए.

संचालन और अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम का संचालन राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक कुमार ने किया. कार्यक्रम में कॉलेज के सभी प्राध्यापक, शिक्षकेत्तर एवं तकनीकी कर्मी राजा कुमार, गुड्डू, प्रदीप सहित 200 से अधिक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.


आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन