नालंदा: हिंदी दिवस पर नीतू सिंह को मिला श्रेष्ठ शिक्षिका सम्मान, इकरा अकादमी में भी हुए कार्यक्रम
पुरस्कार ग्रहण करती शिक्षिका
हिंदी दिवस के अवसर पर खोदागंज बाजार की शिक्षिका नीतू सिंह को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 'श्रेष्ठ शिक्षिका सम्मान' से सम्मानित किया गया. वहीं, इकरा इंग्लिश अकादमी में भी निबंध व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ.
हिंदी दिवस के अवसर पर प्रखंड के खोदागंज बाजार स्थित संत जोसेफ पब्लिक स्कूल की शिक्षिका नीतू सिंह को लायंस क्लब बिहारशरीफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्रेष्ठ शिक्षिका सम्मान से सम्मानित किया गया. इस अवसर पर उन्हें मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र एवं कलम-डायरी देकर नवाजा गया. यह सम्मान लायंस क्लब के अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने एक कार्यक्रम में प्रदान किया.
शिक्षिका के सम्मानित होने पर विद्यालय में हर्ष
शिक्षिका नीतू सिंह के सम्मानित होने पर विद्यालय में हर्ष का माहौल है. जदयू नेता रौशन कुमार, मुखिया सलमा खातून, समाजसेवी गुरुचरण प्रसाद, समाजसेवी आजाद आलम, अखिलेश यादव, मुकेश कुमार सहित अन्य लोगों ने शिक्षिका के सम्मानित होने पर हर्ष व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
इकरा इंग्लिश अकादमी में प्रतियोगिता आयोजित
वहीं, हिंदी दिवस के अवसर पर वहीद उद्दीन एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित इस्लामपुर नगर के बुढ़ानगर स्थित इकरा इंग्लिश अकादमी में छात्र-छात्राओं के बीच हिंदी निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया.
आयोजित प्रतियोगिता में सातवीं कक्षा में प्रथम फरहा फातिमा, इराम एवं दरकशा, पांचवीं कक्षा में प्रथम नवीहा परवीन तथा चौथी कक्षा में प्रथम वानिया एवं सावरिन रहीं. स्कूल की सचिव जमीला बानो एवं व्यवस्थापक राशिद अनवर ने विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया.
हिंदी भारतीय संस्कृति और परंपराओं की अभिव्यक्ति
इस अवसर पर स्कूली छात्र-छात्राओं, गणमान्य लोगों एवं अभिभावकों को हिंदी की महत्ता पर संबोधित करते हुए सचिव जमीला बानो ने कहा कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है. हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भावनाओं की अभिव्यक्ति है.
स्कूल के व्यवस्थापक राशिद अनवर ने कहा कि हिंदी गर्व है, स्वाभिमान है और देश की शान है. उन्होंने कहा कि विगत वर्ष 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा काफी विचार-विमर्श के बाद हिंदी को देश की राजभाषा के रूप में अंगीकार करने का निर्णय लिया गया था.
कई लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में आयशा, कश्मीरी, खुशी, रुकसार परवीन, मुस्कान, शिजा, सिमरन, मुस्कान परवीन, कासिफी तहसीन सहित अन्य कई लोग उपस्थित थे.
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