बिहारशरीफ : शिवालयों से निकलेगा नया संदेश, भगवान शिव को चढ़े फूल-बेलपत्र से बनेगी जैविक खाद

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Ai जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर

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राजगीर में प्रज्ञा कृषक हित समूह की अनूठी पहल, शिव मंदिरों में चढ़ाए गए फूल और बेलपत्र से अब तैयार होगी जैविक खाद। पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाएं यह कदम।

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Sawan 2026 : राजगीर में प्रज्ञा कृषक हित समूह तिलैया बड़हरी ने सावन के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई पहल शुरू की है. अब शिव मंदिरों में भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र, फूल और अन्य जैविक सामग्री को कचरे में नहीं फेंका जाएगा, बल्कि इससे जैविक खाद तैयार की जाएगी.

मंदिरों से जुटाई जाएगी पूजन सामग्री

प्रज्ञा कृषक हित समूह के अध्यक्ष और प्राकृतिक खेती जिला निगरानी समिति के सदस्य अभिमन्यु सिंह ने बताया कि शिवालयों में चढ़ाए गए फूल और बेलपत्र को कचरा समझकर फेंक दिया जाता है. इससे धार्मिक भावना भी प्रभावित होती है और उपयोगी जैविक सामग्री भी बेकार हो जाती है.

बिहारशरीफ और राजगीर के मंदिरों से होगा संग्रह

अभिमन्यु सिंह ने बताया कि उनकी टीम बिहारशरीफ और राजगीर के प्रमुख शिव मंदिरों से पूजा सामग्री एकत्र करेगी. इसके बाद फूल और बेलपत्र को अलग-अलग छांटकर साफ किया जाएगा और वैज्ञानिक प्रक्रिया से कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी.

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

समूह के अनुसार तैयार की गई जैविक खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी. इससे पौधों और फसलों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा. यह पहल रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

कनैल के फूलों का भी होगा उपयोग

अभिमन्यु सिंह ने बताया कि कनैल के फूलों में प्राकृतिक कीटनाशी गुण पाए जाते हैं. इसके उपयोग से मिट्टी में मौजूद कुछ हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है. हालांकि कनैल के पौधे के कई हिस्सों में जहरीले तत्व पाए जाते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा.

30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा अभियान

समूह के कोषाध्यक्ष अमन वर्मा ने बताया कि सावन माह के दौरान विशेष संग्रह अभियान चलाया जाएगा. यह अभियान 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान सावन के सोमवार और मंगलवार को विशेष रूप से पूजा सामग्री संग्रह की जाएगी.

इन तारीखों पर चलेगा विशेष संग्रह अभियान

अमन वर्मा के अनुसार 3, 4 अगस्त, 10, 11 अगस्त, 17, 18 अगस्त और 24, 25 अगस्त को विशेष संग्रह अभियान चलाया जाएगा. इसके अलावा पूरे सावन माह में बिहारशरीफ और राजगीर के प्रमुख शिवालयों से सामग्री जुटाई जाएगी.

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

समूह के सचिव कुमार नरेंद्र देव ने कहा कि यह पहल सावन की आस्था को धरती की सेवा से जोड़ने का प्रयास है. हर साल हजारों श्रद्धालु शिवालयों में पूजा करते हैं और बड़ी मात्रा में बेलपत्र, फूल सहित जैविक सामग्री चढ़ाई जाती है.

कचरे के बजाय उपयोग में आएगी पूजा सामग्री

अब तक मंदिरों से निकलने वाली पूजा सामग्री सामान्य कचरे के साथ डंपिंग यार्ड तक पहुंच जाती थी. नई पहल से इस सामग्री का बेहतर उपयोग होगा और इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा.


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