नालंदा-शेखपुरा के कई इलाकों का बिहारशरीफ से सड़क संपर्क बाधित, सकरी नदी का जलस्तर बढ़ने से डायवर्सन डूबा
डायवर्जन के ऊपर से बहता पानी | Prabhat Khabar Network
बिहारशरीफ-कतरीसराय मार्ग पर सकरी नदी का जलस्तर बढ़ने से डायवर्सन डूब गया है. इस कारण नालंदा और शेखपुरा के दर्जनों गांवों का बिहारशरीफ से सीधा सड़क संपर्क बाधित हो गया है. ग्रामीण जान जोखिम में डालकर जर्जर पुल से गुजरने को मजबूर हैं.
बिहारशरीफ-कतरीसराय मुख्य मार्ग पर दरियापुर के समीप सकरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं. नदी की तलहटी में बनाया गया अस्थायी डायवर्सन पानी में डूब जाने से नालंदा और शेखपुरा जिले के दर्जनों गांवों का बिहारशरीफ से सीधा सड़क संपर्क बाधित हो गया है. वैकल्पिक रास्ता लंबा होने के कारण ग्रामीण अब जान जोखिम में डालकर जर्जर और प्रतिबंधित पुल से गुजरने को मजबूर हैं.
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ईंट की सुरक्षा दीवार तोड़कर आवाजाही कर रहे लोग
लोगों ने पुल के दोनों छोर पर प्रशासन की ओर से लगाई गई ईंट की सुरक्षा दीवार का एक हिस्सा तोड़ दिया है. इसके बाद दोपहिया, तीन पहिया और पैदल यात्रियों की आवाजाही लगातार जारी है. नदी में तेज बहाव और पुल की कमजोर हालत को देखते हुए यहां कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है.
डायवर्सन के डूबने का सबसे ज्यादा असर मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ समेत आसपास के गांवों पर पड़ा है. शेखपुरा और बरबीघा के पश्चिमी इलाके के लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है.

25 किलोमीटर ज्यादा सफर करना पड़ेगा
ग्रामीणों के अनुसार, पहले इन इलाकों से बिहारशरीफ की दूरी करीब 12 से 15 किलोमीटर थी. अब संपर्क टूटने के बाद गिरियक-पावापुरी होकर 35 से 40 किलोमीटर या अस्थावां के रास्ते करीब 25 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है. इसका सीधा असर मरीजों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और दैनिक मजदूरों पर पड़ रहा है. आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन गया है.
सकरी नदी पर बना मुख्य पुल करीब एक दशक पहले तैयार हुआ था, लेकिन इतने कम समय में इसकी स्थिति खराब होने पर निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं.

अवैध बालू खनन से कमजोर हुई नींव
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल के पिलरों के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन से नींव कमजोर हुई है. दो साल पहले आई बाढ़ के बाद पुल के पिलरों में धंसाव शुरू हुआ था. लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने करीब तीन महीने पहले पुल को खतरनाक घोषित कर दिया था. इसके बाद दोनों छोर पर ईंट की दीवार बनाकर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी. हालांकि, लोगों की आवाजाही बनाए रखने के लिए नदी की तलहटी में अस्थायी डायवर्सन तैयार किया गया. मंगलवार को नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद यही डायवर्सन पानी में समा गया.
ग्रामीणों का कहना है कि पुल को खतरनाक घोषित किए जाने के तीन महीने बाद भी स्थायी समाधान की दिशा में काम नहीं होने से समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. अब डायवर्सन के डूब जाने से स्थिति और विकट हो गई है.
क्या कह रहे स्थानीय लोग
पलनी निवासी हीरा कुमार और बैजनाथपुर निवासी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन को पुल की मरम्मत या नए पुल के निर्माण के साथ सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करनी चाहिए.
उनका कहना है कि लोगों को मजबूरी में जर्जर पुल से गुजरना पड़ रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है.
क्या कह रहे हैं अधिकारी
बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी किसलय श्रीवास्तव ने कहा कि क्षेत्र की नदियों के बढ़ते जलस्तर और जलप्रवाह पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है. जर्जर पुल पर आवाजाही रोकने और डायवर्सन को बहाल कराने के लिए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं.
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