हिलसा (नालंदा):- सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने के मामले में थरथरी प्रखंड के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी पर बिहार राज्य सूचना आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है. आयोग ने बीडीओ पर 25,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाते हुए कड़ी चेतावनी भी जारी की है. मामला ग्राम मकुंदन विगहा निवासी राज कुमार सिन्हा द्वारा वर्ष 2019 में दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रखंड समन्वयक कुमारी मिर्जा जानकारी मांगी गई थी, लेकिन कई वर्षों तक उन्हें पूर्ण और सत्यापित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई. राज्य सूचना आयोग के समक्ष हुई सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि लोक सूचना पदाधिकारी सह बीडीओ, थरथरी ने जानबूझकर सूचना उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती और आयोग के पूर्व आदेशों का भी पालन नहीं किया. यहां तक कि आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट भी समय पर प्रस्तुत नहीं की गई. इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए राज्य सूचना आयुक्त ब्रजेश मेहरोत्रा ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत बीडीओ पर 25 हजार रुपया का जुर्माना लगाया. साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि अगली सुनवाई की तिथि 25 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे वे स्वयं उपस्थित होकर पूरी मांगी गई सूचना के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें, अन्यथा उनके विरुद्ध धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी. आयोग ने इस आदेश की प्रति जिलाधिकारी नालंदा और कोषागार पदाधिकारी को भी भेजी है, ताकि जुर्माने की वसूली सुनिश्चित की जा सके. यह फैसला न केवल आरटीआई कानून की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि सूचना छिपाने या टालमटोल करने वाले अधिकारियों को अब बख्शा नहीं जाएगा.
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