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कोरोना की भेंट चढ़ा बिहार पंचायत चुनाव, अगले माह छिन जाएंगे मुखिया के अधिकार, अध्यादेश लाने की तैयारी में सरकार

Updated at : 05 May 2021 8:31 PM (IST)
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कोरोना की भेंट चढ़ा बिहार पंचायत चुनाव, अगले माह छिन जाएंगे मुखिया के अधिकार, अध्यादेश लाने की तैयारी में सरकार

Bihar Panchayat Election 2021 Date: बिहार के त्रिस्तरीय पंचायतों का चुनाव कोरोना की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. 2016 में हुए आम पंचायत चुनाव का कार्यकाल 15 जून को पूरा हो रहा है. और तब तक चुनाव होना असंभव है. यानी इस दिन मुखिया सहित तमाम पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार छिन जाएंगे.

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बिहार पंचायत चुनाव कोरोना की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है. 2016 में हुए आम पंचायत चुनाव का कार्यकाल 15 जून को पूरा हो रहा है. और तब तक चुनाव होना असंभव है. यानी इस दिन मुखिया सहित तमाम पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार छिन जाएंगे. यही कारण है कि कोरोना महामारी को देखते हए पंचायती राज विभाग अध्यादेश लाने की तैयारी में जुट गया है.

जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होते ही त्रिस्तरीय पंचायतों के संचालन का कार्य अधिकारियों को सौंप दिया जायेगा. विकास योजनाओं की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति का अधिकार बीडीओ, डीडीसी और डीएम को सौंपने का मसौदा पंचायती राज विभाग तैयार कर रहा है. मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने के बाद जनप्रतिनिधियों के अधिकार अधिकारियों को मिल जायेंगे.

Bihar Panchayat Election: चुनाव कराने का फैसला ठंडे बस्ते में

इधर राज्य सरकार अध्यादेश लाने की तैयारी है तो 15 जून से पहले त्रिस्तरीय पंचायतों का चुनाव असंभव देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने के निर्णय को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. पंचायत आम चुनाव में विलंब होने का कारण इवीएम खरीद का विवाद हुआ. अभी यह विवाद समाप्त ही हुआ था और राज्य निर्वाचन आयोग इवीएम मॉडल-दो से चुनाव कराने की तैयारी कर रहा था कि कोरोना के संक्रमण ने आयोग की तैयारी पर पानी फेर दिया.

ऐसे में सरकार के पास एक मात्र विकल्प पंचायती राज कानून 2006 में संशोधन ही शेष है. इसी के तहत पंचायती राज विभाग कानून में संशोधन का मसौदा तैयार कर रहा है. चुनाव पर विचार करने के लिए आयोग ने 21 अप्रैल को 15 दिनों का समय लिया था. आयोग को उम्मीद थी कि कोरोना की रफ्तार कम हो जाएगी. समय सीमा समाप्त होने के बाद कोरोना की रफ्तार कम होने के बदले बढ़ती जा रही है.

ऐसे में यह तय है कि जून के पहले सप्ताह में मानसून का प्रवेश के कारण आयोग के लिए चुनाव करना संभव नहीं होगा. जानकारों का कहना है कि पंचायती राज संस्थाओं के अधिकार किसे दिए जाये इसका जिक्र बिहार पंचायती राज अधिनियम में नहीं है. वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए सरकार को अध्यादेश लाना होगा. विचार इस पर भी किया जा सकता है कि पंचायती राज संस्थाओं के कार्यकाल का विस्तार किया जाये.

चुनाव को लेकर पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी का कहना है कि चुनाव कब होंगे, इसका फैसला आयोग करेगा. राज्य सरकार फंड और अन्य इंतजाम करती है. सरकार वह काम कर चुकी है. अभी तक जो स्थिति बनी है उसमें चुनाव कराना संभव नहीं लग रहा है.

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Posted By: Utpal Kant

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