बिहार को 2026 में नहीं मिल पायेंगे नये डॉक्टर !, एक साल लेट हुआ सत्र, जानिये क्या रहे कारण

Published at :20 Jan 2022 9:45 AM (IST)
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बिहार को 2026 में नहीं मिल पायेंगे नये डॉक्टर !, एक साल लेट हुआ सत्र, जानिये क्या रहे कारण

पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट डॉ एके ठाकुर ने कहा कि सत्र 2021 में एडमिशन लेने वालों की पढ़ाई बाधित नहीं होंगी, लेकिन बिहार के साथ-साथ पूरे देश को डॉक्टर लेट से मिलेंगे.

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अनुराग प्रधान. पटना. कोर्ट में मामला जाने के कारण मेडिकल कॉलेजों में सत्र 2021 की नामांकन प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई है. अभी केवल काउंसेलिंग में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है. नामांकन और सत्र शुरू होने में देरी है. नये सत्र 2021 की पढ़ाई मार्च 2022 में शुरू होगी.

स्टेट कोटे की 85 प्रतिशत सीटों के लिए एडमिशन पहले चरण की एडमिशन प्रक्रिया 24 जनवरी से शुरू होगी. वहीं, केंद्रीय कोटे की 15 प्रतिशत सीटों के पर पहले चरण की एडमिशन प्रक्रिया 30 जनवरी से चार फरवरी तक चलेगी. लेट से एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से सभी मेडिकल कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ स्टूडेंट्स की भी बेचैनी बढ़ी हुई है.

इस बार एडमिशन प्रक्रिया सत्र 2020 से भी काफी लेट शुरू हुई है. इस बार भी एमबीबीएस फर्स्ट इयर के स्टूडेंट्स का सिलेबस कम करना पड़ जायेगा. इससे स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर असर पड़ेगा. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य भी जल्द एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर क्लास शुरू करने की बात कर रहे हैं.

राज्य के विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यों ने कहा कि सत्र 2021 में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स का सत्र छोटा किया जायेगा. विभाग को प्रस्ताव भेजना होगा. पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट डॉ एके ठाकुर ने कहा कि सत्र 2021 में एडमिशन लेने वालों की पढ़ाई बाधित नहीं होंगी, लेकिन बिहार के साथ-साथ पूरे देश को डॉक्टर लेट से मिलेंगे.

बिहार को भी 2171 डॉक्टर 2026 में नहीं मिल पायेंगे. इस बार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1121 सीटों पर एडमिशन होगा. वहीं, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 1050 सीटों पर एडमिशन होना है. डॉ ठाकुर ने कहा कि सत्र 2021 का एडमिशन 2022 में शुरू होने के कारण बिहार को डॉक्टर 2027 में मिलने की उम्मीद है. क्योंकि स्टूडेंट्स की पूरी पढ़ाई बहुत जरूरी है.

कोरोना और कोर्ट के चक्कर में लेट हो गया सत्र

कोरोना और कोर्टमें मामला जाने के कारण एमबीबीएस 2021 का सत्र करीब आठ माह की देरी से शुरू होगा. 2020 में भी एमबीबीएस का सत्र छह से सात महीने लेट से शुरू हुआ था. कोरोना और आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्टमें मामला जाने के बाद यह 2021 का सत्र 2022 में शुरू हो रहा है. विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों ने कहा कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के फाउंडेशन कोर्स पर असर पड़ता है.

नीट यूजी 2021 का रिजल्ट दो नवंबर को जारी हुआ

नीट यूजी के इतिहास में यह पहला मौका है जब केंद्रीय कोटे के 15 और स्टेट कोटे की 85 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स को लंबा इंतजार करना पड़ा है. गौरतलब है कि नीट यूजी 2021 का रिजल्ट दो नवंबर को जारी हुआ था. रिजल्ट जारी होने के बाद भी अब तक काउंसेलिंग प्रक्रिया शुरू होने के इंतजार में स्टूडेंट्स बैठे हुए थे.

2020 के अक्तूबर में शुरू हो गयी थी काउंसेलिंग प्रक्रिया

साल 2020 में कोरोना के समय भी 27 अक्तूबर से काउंसेलिंग प्रक्रिया शुरू करदी गयी थी. छह से 12 नवंबर तक मेडिकल कॉलेजों में रिपोर्टिंग करनी थी. 24 दिसंबर 2020 तक ऑल इंडिया कोटे की सीटों के लिए मॉपअप राउंड हुआ था और जनवरी में सत्र शुरू हुआ था.

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