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Bihar News: तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी फलेगी मुजफ्फरपुर की शाही लीची

Updated at : 06 Mar 2024 5:02 AM (IST)
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Bihar News: तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी फलेगी मुजफ्फरपुर की शाही लीची

Bihar News मुजफ्फरपुर की शाही लीची अब दूसरे राज्यों में होगी. देश के दक्षिण और पश्चिमी भाग में रहने वाले किसान इसमें रुचि दिखा रहे हैं

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Bihar News शाही लीची के पौधे अब दक्षिण और पश्चिम भारत में भी लहलहाएंगे. तमिलनाडु और महाराष्ट्र की धरती पर शाही लीची का दायरा बढ़ाने को लेकर राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र पहल कर रहा है. इसके लिये परिसर में लीची बैंक की स्थापना की गई है. इस बैंक में 37 हजार पौधे तैयार किये जा रहे हैं.

इन पौधों को अलग-अलग राज्यों में किसानों के बीच भेजा जायेगा. यहां से पांच-पांच हजार पौधा कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र भेजा गया है. अन्य राज्यों के इच्छुक किसानों को भी पौधा भेजे जाने की योजना है. इसके लिये लीची अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक विशेष तरीके से पौधों को तैयार कर रहे हैं और इसकी विधिवत देखभाल की जा रही है. यहां के परिसर स्थित पौधशाला की क्षमता 50 हजार है. भविष्य में इसे बढ़ाया भी जायेगा. वैज्ञानिकों को कहना है कि यहां तैयार लीची के पौधे उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में भी भेजे जा रहे हैं.

एससी की महिलाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र में एससी जाति की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार स्थापित करने के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की गई है. यहां फिलहाल 25 महिलायें प्रशिक्षण ले रही हैं. उन्हें लीची से जुड़े उत्पादों के बारे में बताया जा रहा है. जिस एससी जाति की महिलाओं के पास दो से चार डिसमिल जमीन होगी, उन्हें लीची अनुसंधान केंद्र शाही लीची के पौधे भी देगी. साथ ही उन पौधों की देखभाल कैसे करनी है इनके बारे में भी बताया जायेगा. प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को लीची उत्पादों से जोड़ कर उन्हें स्वरोजगार के लिये प्रोत्साहित करना है.

शाही लीची अब दूसरे राज्यों में होगी

लीची अनुसंधान केंद्र में तैयार किये जा रहे पौधे दूसरे राज्यों में जा रहे हैं. मुजफ्फरपुर की शाही लीची अब दूसरे राज्यों में होगी. देश के दक्षिण और पश्चिमी भाग में रहने वाले किसान इसमें रुचि दिखा रहे हैं. उन्हें लीची के पौधे दिये जा रहे हैं. इसके अलावा एससी की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये लीची से जुड़े उत्पादों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
– डॉ विकास दास, निदेशक, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र

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RajeshKumar Ojha

लेखक के बारे में

By RajeshKumar Ojha

Senior Journalist with more than 20 years of experience in reporting for Print & Digital.

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