बिहार में जमीन रजिस्ट्री अब पूरी तरह ऑनलाइन, लेकिन लोगों को क्यों हो रही परेशानी

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बिहार में पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री शुरू होते ही बढ़ी परेशानी

बिहार में जमीन रजिस्ट्री को कागज रहित करने की नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई इलाकों में काम प्रभावित हुआ है. मुंगेर में 16 दिनों में केवल 5 रजिस्ट्री होने से सरकारी राजस्व में भारी गिरावट आई है. इस नई ऑनलाइन प्रणाली को लेकर लोगों में उलझन है और इसका विरोध भी हो रहा है.

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Bihar Paperless Land Registrartion: बिहार में जमीन रजिस्ट्री को कागज रहित करने की नई व्यवस्था लागू होते ही कई इलाकों में काम प्रभावित हुआ है. कुछ रजिस्ट्री कार्यालयों में बहुत कम लोग पहुंच रहे हैं, जबकि कई जगह दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता काम बंद कर विरोध कर रहे हैं. नई व्यवस्था को लेकर जमीन खरीदने और बेचने वाले लोगों में भी उलझन बनी हुई है. इसका असर जमीन की खरीद-बिक्री के साथ सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी दिखाई देने लगा है. मुंगेर में नई व्यवस्था को लेकर स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में है.

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मुंगेर में 16 दिन में सिर्फ 5 रजिस्ट्री

मुंगेर में 3 अगस्त से कागज रहित जमीन रजिस्ट्री की नई व्यवस्था शुरू की गई थी. इसके 16 दिन बाद भी काम पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है. जिला निबंधन कार्यालय में अब तक सिर्फ पांच दस्तावेजों की रजिस्ट्री होने की बात सामने आई है. खड़गपुर में भी अब तक केवल एक दस्तावेज की रजिस्ट्री होने की जानकारी सामने आई है. इससे साफ है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन रजिस्ट्री का काम काफी धीमा हुआ है.

जुलाई में 461 रजिस्ट्री, अगस्त में सिर्फ 5

मुंगेर में नई व्यवस्था का असर सरकारी कमाई के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है. पांच दस्तावेजों की रजिस्ट्री से सरकार को करीब 10 लाख 14 हजार 629 रुपये का राजस्व मिला है. जुलाई महीने में मुंगेर में 461 दस्तावेजों की रजिस्ट्री हुई थी. इससे सरकार को 6 करोड़ 32 लाख 65 हजार 507 रुपये की आय हुई थी.

इस साल में मुंगेर जिला निबंधन कार्यालय को 65 करोड़ 7 लाख रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया गया है. ऐसे में रजिस्ट्री का काम धीमा होने से इस लक्ष्य को पूरा करना भी चुनौती बन सकता है.

अब कागज की जगह ऑनलाइन जमा होगा दस्तावेज

नई व्यवस्था में जमीन रजिस्ट्री का पूरा काम ऑनलाइन किया जा रहा है. पहले की तरह कागज के दस्तावेज जमा करने के बजाय अब दस्तावेज की पीडीएफ प्रति ऑनलाइन जमा करनी होगी. जमीन खरीदने और बेचने वाले व्यक्ति की पहचान भी ऑनलाइन तरीके से की जाएगी.

इसके बाद डिजिटल हस्ताक्षर और ई-केवाईसी के जरिए रजिस्ट्री की बाकी प्रक्रिया पूरी होगी. सरकार का कहना है कि इस तरीके से जमीन रजिस्ट्री का काम ज्यादा साफ और सुरक्षित होगा.

ओटीपी से बुजुर्गों की परेशानी बढ़ने की चिंता

नई व्यवस्था में मोबाइल और ओटीपी के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि ओटीपी पर आधारित प्रक्रिया आम लोगों के लिए आसान नहीं हो सकती.

बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे लोगों को मोबाइल, ओटीपी, डिजिटल हस्ताक्षर और ऑनलाइन दस्तावेज से जुड़ी प्रक्रिया समझने में परेशानी हो सकती है. उनका कहना है कि इन चीजों के गलत इस्तेमाल का खतरा भी बना रहेगा. इसलिए नई व्यवस्था लागू करने से पहले लोगों को इसकी सही जानकारी देना जरूरी है.

साइबर ठगी को लेकर भी उठ रहे सवाल

दस्तावेज लेखक नई ऑनलाइन व्यवस्था में साइबर ठगी की आशंका भी जता रहे हैं. उनका कहना है कि फर्जी वेबसाइट या लिंक के जरिए लोगों को फंसाया जा सकता है. ओटीपी की ठगी, मोबाइल और ईमेल में सेंध जैसी घटनाओं का खतरा भी हो सकता है.

दस्तावेज लेखक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि अगर भविष्य में ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किसी की जमीन के साथ धोखा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. उनका कहना है कि इस बात को भी साफ किया जाना चाहिए.

कई जिलों में नई व्यवस्था का विरोध

बिहार के आरा, पूर्णिया, सासाराम और दूसरे जिलों में भी कागज रहित जमीन रजिस्ट्री को लेकर विरोध और असमंजस की स्थिति सामने आई है. कई जगह दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता काम बंद कर विरोध कर रहे हैं.

इन लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से उनके काम और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है. इसी वजह से वे सरकार से अपनी परेशानियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं.

अधिकारियों का क्या कहना है

निबंधन विभाग के अधिकारी दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं की सभी आशंकाओं से सहमत नहीं हैं. अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में जमीन के दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएंगे.

जरूरत पड़ने पर इन दस्तावेजों को बैंक या अदालत में भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा. विभाग का कहना है कि कागज रहित व्यवस्था से दस्तावेज में छेड़छाड़ और फर्जी काम की संभावना कम होगी.

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नई व्यवस्था को आसान बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

कागज रहित जमीन रजिस्ट्री शुरू करने का मकसद काम को आसान, सुरक्षित और साफ बनाना है. लेकिन शुरुआत में कई जगह लोगों और रजिस्ट्री से जुड़े लोगों को परेशानी हो रही है.

अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस व्यवस्था को आम लोगों के लिए आसान बनाने की है. दस्तावेज लेखक और स्टांप बेचने वालों की चिंताओं को दूर करने के साथ लोगों को ऑनलाइन रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया समझानी होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो सुविधा के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी बन सकती है.

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परितोष शाही

लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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