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बिहार की बालिका साइकिल योजना का विदेशों में भी दिख रहा प्रभाव, लड़कियों की शिक्षा में हो रहा बदलाव

Updated at : 24 May 2023 3:47 AM (IST)
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बिहार की बालिका साइकिल योजना का विदेशों में भी दिख रहा प्रभाव, लड़कियों की शिक्षा में हो रहा बदलाव

जांबिया में बालिका साइकिल योजना के बिहारी मॉडल के हस्तक्षेप से एक साल के बाद स्कूलों में लड़कियों की अनुपस्थिति में 27 प्रतिशत की कमी आयी. देर से स्कूल आने में 66 प्रतिशत की कमी आयी और स्कूलों तक पहुंचने का औसत समय 35 प्रतिशत तक कम हो गया.

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बिहार की बालिका साइकिल योजना का प्रभाव सात समंदर दूर अफ्रीकन देश जांबिया में दिख रहा है. जांबिया की सरकार ने वहां लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बिहार की मुख्यमंत्री साइकिल योजना को अपनाया. इससे वहां की बालिका शिक्षा पर अच्छा असर देखने को मिला.

दरअसल, यूएसए की नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रो निशीथ प्रकाश ने आद्री और आइजीसी के साथ मिल कर मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना पर शाेध किया था. उनके रिसर्ज पेपर का जब प्रकाशन हुआ तो जांबिया की सरकार ने इस पर कार्य शुरू किया. प्रो प्रकाश ने मंगलवार को आद्री परिसर में व्हील्स ऑफ चेंज: ट्रांसफॉर्मिंग गर्ल्स लाइव्स विथ बाइसिकल्स विषय पर व्याख्यान के दौरान इसकी जानकारी दी. प्रो प्रकाश ने बताया कि बिहार की मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना शिक्षा में लैंगिक अंतर को कम करने में कामयाब रही है.

जांबिया में इसी बिहारी मॉडल के हस्तक्षेप से एक साल के बाद स्कूलों में लड़कियों की अनुपस्थिति में 27 प्रतिशत की कमी आयी. देर से स्कूल आने में 66 प्रतिशत की कमी आयी और स्कूलों तक पहुंचने का औसत समय 35 प्रतिशत तक कम हो गया. साइकिल योजना के लागू होने से लड़कियों के गणित परीक्षा के अंकों में सुधार हुआ और उन्होंने महसूस किया कि उनका अपने जीवन पर नियंत्रण है. अब वे एक बेहतर आत्म-छवि के साथ बड़ी चीजों की आकांक्षा कर सकती हैं. उनमें विवाह और गर्भधारण के लिए सही उम्र तक इंतजार करने की इच्छा भी जगी. बाद में इस मॉडल को संयुक्त राष्ट्र यूएन ने भी अपनाया और अन्य छह अफ्रीकी देशों में लागू किया.

प्रो प्रकाश ने बताया कि यह योजना बिहार में जबरदस्त रूप से सफल रही है क्योंकि इसने कई किशोरियों के प्रमुख चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया है. चुनौतियों में स्कूल जाते समय लड़कियों की सुरक्षा, घर से स्कूल तक की असुविधाजनक लंबी दूरी और गहरे सांस्कृतिक मानदंड शामिल थे. उन्होंने पाया कि इस योजना से लड़कियों की स्कूल उपस्थिति में सुधार हुआ और उनकी ड्रॉपआउट दर में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आयी. योजना की इन सारी खूबियों ने देश के कई राज्यों को बिहार का अनुकरण करने के लिए प्रेरित किया.

बिहार के सूचना आयुक्त त्रिपुरारी शरण ने कहा कि सीएम साइकिल योजना से बिहार की लड़कियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. साइकिल योजना की वजह से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की है और उन्हें सुयोग्य जीवन साथी मिला है.

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आद्री की डा अस्मिता गुप्ता ने प्रो प्रकाश को अपने अकादमिक भाई के रूप में पेश किया. दोनों के शोध प्रबंध नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के एक छात्र की देखरेख में पूरे हुए थे. प्रो. प्रकाश कई वर्षों से आद्री से जुड़े रहे हैं. डा गुप्ता ने जोर देकर कहा कि यह शोध अध्ययन एक बड़ी सफलता की कहानी रही है, जिसकी बिहार को बहुत जरूरत थी. आद्री के आइजीसी-बिहार कार्यक्रम का उद्देश्य इस तरह का शोध करना था जिसे वास्तविक दुनिया में लागू किया जा सके.

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