मछली उत्पादन में इस वर्ष आत्मनिर्भर होगा उत्तर बिहार, सीतामढ़ी में एक वर्ष में बढ़ा डेढ़ हजार मीट्रिक टन उत्पादन

Updated at : 01 Jan 2024 10:11 PM (IST)
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मछली उत्पादन में इस वर्ष आत्मनिर्भर होगा उत्तर बिहार, सीतामढ़ी में एक वर्ष में बढ़ा डेढ़ हजार मीट्रिक टन उत्पादन

वर्तमान में अब 3993 हेक्टेयर जल क्षेत्रों में लगभग 20 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है. जिसमें मुख्य रूप से रोहू, नैनी, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प व पंगेसियस समेत अन्य प्रजाति शामिल है. एक अनुमान के मुताबिक जिले में 60 से 70 फीसदी लोग मछली खाने के शौक़ीन है.

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सीतामढ़ी. सीतामढ़ी जिला अब नीली क्रांति की ओर अग्रसर हो रहा है. इस वर्ष 2023 में लगभग डेढ़ हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन में वृद्धि हुयी है. पूर्व के वर्षों में महज कुछ ही हेक्टेयर में उत्पादित होने वाले मछली उत्पादन का स्वरूप अब वृहद होता जा रहा है. वर्तमान में अब 3993 हेक्टेयर जल क्षेत्रों में लगभग 20 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है. जिसमें मुख्य रूप से रोहू, नैनी, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प व पंगेसियस समेत अन्य प्रजाति शामिल है. इस जल क्षेत्र में 2642 हेक्टेयर निजी तो 1351 हेक्टेयर सरकारी जलकर शामिल है. एक अनुमान के मुताबिक जिले में 60 से 70 फीसदी लोग मछली खाने के शौक़ीन है. यही कारण है कि जिले में प्रतिदिन लगभग 2 मीट्रिक टन आंध्रप्रदेश व पश्चिमी बंगाल से मछली का आयात होता है.

1220 लाभुक विभिन्न योजनाओं से हुए लाभान्वित

मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर मत्स्यपालकों के आय में वृद्धि करने को लेकर केंद्र व राज्य सरकार की कई योजनाएं संचालित है. इस वर्ष विभिन्न योजनाओं से कुल 1220 लाभुक लाभान्वित हुए है. नीली क्रांति योजना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अलावे सात निश्चय-2 के तहत अलंकारी थोक, खुदरा, ब्रीडर, शौकिया पालनकर्ता व्यवसायी को अलंकारी आधारभूत संरचना व संवर्धन इकाइयों का सुदृढ़ीकरण व इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को सहायता पहुंचा कर इस कारोबार को सतत व टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से समग्र अलंकारी मात्स्यिकी योजना के तहत थोक अलंकारी मत्स्य संवर्धन व विपणन, अलंकारी मत्स्य प्रजनन इकाई व अलंकारी मत्स्य इकाई सहायता योजना से लाभान्वित कराया जा रहा है. जबकि निजी तालाबों का जीर्णोद्धार योजना के तहत पुराने निजी व योजनान्तर्गत निर्मित निजी तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है.

प्रखंडवार सरकारी जलक्षेत्रों की स्थिति

प्रखंड संख्या जलक्षेत्र (हेक्टेयर)

  • डुमरा 112 151.52

  • नानपुर 73 85.89

  • पुपरी 70 81.34

  • बाजपट्टी 87 87.68

  • बेलसंड 34 20.34

  • परिहार 183 179.52

  • परसौनी 25 35.14

  • बथनाहा 113 93.73

  • बैरगनिया 21 25.54

  • मेजरगंज 31 18.20

  • रीगा 63 46.12

  • रुन्नीसैदपुर 129 203.94

  • सुरसंड 129 90.45

  • सोनबरसा 132 115.18

  • बोखरा 58 66.22

  • सुप्पी 15 31.21

  • चोरौत 76 97.46

क्या कहते हैं अधिकारी

जिले में मछली पालन की अपार संभावना है. मत्स्य पालन के क्षेत्र में खासकर युवा पीढ़ी भी जागरूक हो रहे है. इनकी जागरूकता को लेकर सरकारी स्तर से प्रशिक्षण व भ्रमण के साथ-साथ विभिन्न योजनाओं से उन्हें लाभान्वित भी कराया जा रहा है, ताकि मत्स्य पालन को बढ़ावा देते हुए मत्स्यपालकों की आय में वृद्धि किया जा सके.

  • शंभु प्रसाद नायक, जिला मत्स्य अधिकारी

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सीतामढ़ी शहर, डुमरा व पुपरी में बनेगा बाजार

नये वर्ष में मत्स्य विक्रेताओं को स्थायी बाजार के साथ-साथ दुकान उपलब्ध करायी जायेगी. यह सुविधा उन्हें मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत मिलेगा. प्रखंड व पंचायत स्तरीय मत्स्य बाजार निर्माण से संबंधित विभागीय स्तर से आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली गयी है. फिलहाल जिले के तीन स्थानों पर बाजार व दुकान का निर्माण कराया जायेगा. जिसमें जिला मुख्यालय स्थित गुदरी बाजार, सीतामढ़ी शहर स्थित गुदरी बाजार व पुपरी बाजार शामिल है. बताया गया है कि उक्त योजना के तहत मत्स्य बाजार का इकाई लागत 25 लाख रुपये है. जिसके निर्माण के लिए कार्य एजेंसी का चयन ई-टेंडर के माध्यम से किया जायेगा.

डीएफओ को मिली दुकान आवंटन की जिम्मेवारी

मत्स्य बाजार निर्माण के बाद दुकान का वार्षिक किराया का निर्धारण व वसूली, आवंटन, बाजार का रख-रखाव व प्रबंधन की जिम्मेवारी जिला मत्स्य अधिकारी की होगी. बताया गया कि उप मत्स्य निदेशक की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा विधिवत चयनित लाभुकों को निर्मित मत्स्य बाजार के तहत दुकान का आवंटन पांच वर्षों के लिए किया जायेगा.

ग्रुप के माध्यम से होगा संचालन

वहीं बाजार के दैनिक प्रबंधन के लिए मत्स्य विक्रेताओं का समूह ही आपसी सहमति से एक यूजर ग्रुप का निर्माण करेगी. इस समूह में स्टॉलधारी ही सद्स्य होंगे, जिसका दैनिक प्रबंधक होगा जो रोटेशन के आधार पर प्रत्येक छह माह में इसके स्थायी सदस्य को इसकी जिम्मेवारी ट्रांसफर हो जाएगी. दैनिक प्रबंधन में साफ-सफाई, जलापूर्ति, संरचनाओं की छोटी-छोटी मरम्मति, मछली का आवक व बिक्री का रिकॉर्ड शामिल होगी.

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