भागलपुर: कहलगांव और शहर में गंगा का जलस्तर स्थिर, कमी की उम्मीद; BAU ने दी 48 घंटे में तेज हवा और भारी बारिश की चेतावनी
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गंगा नदी का जलस्तर भागलपुर और कहलगांव में स्थिर हो गया है, जिससे तटवर्ती इलाकों में राहत है. वहीं, बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने अगले 48 घंटों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. जिला कृषि विभाग भी बाढ़ और बारिश से फसल को बचाने के लिए अलर्ट पर है.
भागलपुर और कहलगांव में पिछले कई दिनों से उफान पर चल रही गंगा नदी के जलस्तर में गुरुवार को ठहराव देखने को मिला है. जल संसाधन विभाग के अनुसार, जलस्तर की तीव्र वृद्धि की रफ्तार अब थम चुकी है और गुरुवार दोपहर बाद से जलस्तर में क्रमिक गिरावट दर्ज होने की प्रबल संभावना है.
दूसरी ओर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर के मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के भीतर मौसम में बड़े बदलाव का पूर्वानुमान जारी किया है. विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानियों के अनुसार, जिले में तेज हवाओं के झोंकों के साथ भारी बारिश होने की पूरी संभावना है.
गंगा का जलस्तर स्थिर, घटने के आसार से तटवर्तियों को राहत
जल संसाधन विभाग के केंद्रीय जल मापन केंद्र के अनुसार, कहलगांव और भागलपुर शहरी क्षेत्र में गंगा का बढ़ाव स्थिर हो गया है.
गुरुवार शाम से पानी नीचे उतरने की उम्मीद है, जिससे दियारा और निचले इलाकों में रह रहे लोगों ने राहत की सांस ली है. इधर, गुरुवार सुबह से ही आसमान में काले-घने बादलों की आवाजाही ने तीखी धूप की तपिश को रोके रखा, जिससे उमस भरी गर्मी से आम नागरिकों को कुछ हद तक राहत मिली है.
BAU सबौर की चेतावनी: 48 घंटे में बदलेगा मिजाज, आंधी-पानी के आसार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के मौसम वैज्ञानिकों के ताजा बुलेटिन के अनुसार, वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के कारण भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में अगले 48 घंटों में मौसम तेजी से करवट लेगा.
इस दौरान तेज हवाओं के साथ जिले के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है. किसानों और आमजनों को आकाशीय बिजली (वज्रपात) और मेघगर्जन के दौरान खुले स्थानों पर न रहने की हिदायत दी गई है.
बाढ़ से प्रभावित धान की फसल पर कृषि विभाग का कड़ा पहरा
गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित भारी वर्षा को देखते हुए जिला कृषि विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है.
- स्थलीय निरीक्षण के आदेश: जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) ने जिले के सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों (बीएओ) को निर्देश दिया है कि वे सीधे खेतों पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें.
- नुकसान का आकलन: बाढ़ या जलजमाव के पानी में कितनी एकड़ धान की फसल डूबी है अथवा बर्बाद हुई है, इसका पंचायतवार सटीक ब्योरा तैयार किया जाए.
- एक सप्ताह की समयसीमा: सभी प्रखंड पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत क्षति रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया है, ताकि प्रभावित किसानों को ससमय सरकारी मुआवजा या राहत उपलब्ध कराई जा सके.
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