भागलपुर: कहलगांव में गंगा की बाढ़ से थमा पंचायत परिसीमन का काम; राज्य निर्वाचन आयोग ने 3 दिन बढ़ाई मियाद, 11 पंचायतों में जियो टैगिंग ठप

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बाढ़ में डूबा गांव

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कहलगांव प्रखंड में गंगा की बाढ़ के कारण पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन का कार्य बाधित हो गया है. निचले इलाकों में जलजमाव और संपर्क मार्ग टूटने से 11 पंचायतें प्रभावित हुई हैं. विभाग ने स्थिति को देखते हुए काम के लिए तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है.

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भागलपुर के कहलगांव प्रखंड में पंचायत सीमा तय करने का काम चल रहा था. यह काम 2011 की जनगणना के आधार पर हो रहा था, लेकिन गंगा नदी की बाढ़ ने इसे रोक दिया है.

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प्रखंड के 658 जनगणना ब्लॉकों में से लगभग 400 में जियो टैगिंग का काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन गंगा के उफान और निचले इलाकों में भारी जलजमाव के कारण दर्जनों पंचायतों में फील्ड सर्वे का काम बीच में ही अटक गया है. पहले इस काम को पूरा करने की आखिरी तारीख 10 सितंबर तय की गई थी, जिसे राज्य चुनाव आयोग ने बाढ़ की भयानक स्थिति को देखते हुए तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया है.

नाव के सहारे बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर जियो टैगिंग का महत्वपूर्ण काम करते हुए अधिकारी.
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर जियो टैगिंग का महत्वपूर्ण काम करते हुए अधिकारी.

बाढ़ से 11 पंचायतें प्रभावित, संपर्क रास्ते टूटे

गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रखंड की 11 मुख्य पंचायतें सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं, जिनमें भोलसर, प्रशस्तडीह, कोदवार, घोघा, जनीडीह, पक्कीसराय, अंतीचक, किशनदासपुर, बीरबन्ना, मोहनपुर गोघट्टा और ओगरी शामिल हैं.

ओगरी राजस्व गांव और महेषामुंडा का आधा हिस्सा पानी में डूब चुका है. गांवों को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते पानी में समा गए हैं, जिससे सर्वे और जियो टैगिंग में लगी प्रशासनिक टीमों को केवल नाव के सहारे ही प्रभावित इलाकों में पहुंचना पड़ रहा है.

कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल, ज़हरीले जीवों का खतरा

ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी गंभीर परेशानियां बताईं. कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन और विभाग की ओर से इस आपदा के समय ज़रूरी सुरक्षा उपकरण या पर्याप्त साधन (जैसे बूट, लाइफ जैकेट या खास नावें) मुहैया नहीं कराए गए हैं.

बाढ़ के गंदे पानी, घनी झाड़ियों और सुनसान इलाकों में काम करते समय सांप, बिच्छू और अन्य ज़हरीले कीड़े-मकोड़ों का लगातार खतरा बना हुआ है. अक्सर तो इन कर्मचारियों के पास इन खतरों से बचने के लिए रबर के जूते या जान बचाने वाले जैकेट तक नहीं होते. इसके बावजूद कर्मचारी जान जोखिम में डालकर सीमांकन बिंदु दर्ज कर रहे हैं.

बाढ़ के पानी के बीच जान जोखिम में डालकर पंचायत परिसीमन के लिए जियो टैगिंग करते हुए सरकारी कर्मचारी.
बाढ़ के पानी के बीच जान जोखिम में डालकर पंचायत परिसीमन के लिए जियो टैगिंग करते हुए सरकारी कर्मचारी.

40% से ज़्यादा काम पूरा, तीन दिन मिली मोहलत: बीडीओ

प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राजीव रंजन ने मौजूदा हालात बताते हुए कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद 40 फ़ीसदी से ज़्यादा काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है.

"हाँ, बाढ़ की वजह से दूर-दराज के इलाकों में काम पूरा करने में थोड़ी दिक्कतें तो आई हैं. हमने 10 सितंबर तक काम ख़त्म करने का सोचा था, पर चुनाव आयोग ने हालात देखते हुए तीन दिन और बढ़ा दिए हैं. हमारे लोग जी-जान लगाकर बाकी जगहों की जियो टैगिंग पूरी कर रहे हैं." — राजीव रंजन, बीडीओ, कहलगांव

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