विक्रमशिला सेतु पर सियासी टकराव, मंत्री बोले प्राकृतिक आपदा तो सांसद ने उठाया रखरखाव पर सवाल
गोपालपुर विक्रमशिला सेतु का फोटो | Prabhat Khabar Network
भागलपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु की स्थिति को लेकर बिहार सरकार के मंत्री बूलो मंडल और भागलपुर के सांसद अजय मंडल आमने-सामने हैं. मंत्री इसे प्राकृतिक आपदा बता रहे हैं, वहीं सांसद ने विभागीय लापरवाही और खराब रखरखाव को जिम्मेदार ठहराया है. दोनों नेताओं के अलग-अलग बयानों से पुल के परिचालन बंद होने की तारीख पर भी अनिश्चितता है, जो इस महत्वपूर्ण मार्ग से जुड़े लाखों लोगों के लिए चिंता का विषय है.
Vikramshila Setu: भागलपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु की मौजूदा स्थिति को लेकर बिहार सरकार के मंत्री और भागलपुर के जदयू सांसद आमने-सामने आ गये हैं. गोपालपुर विधायक सह बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बूलो मंडल पुल की क्षति को प्राकृतिक आपदा का परिणाम बता रहे हैं, जबकि भागलपुर के जदयू सांसद अजय मंडल ने इसके लिए विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और समय पर रखरखाव नहीं होने को जिम्मेदार ठहराया है.
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दोनों नेताओं के बयान से मामला अब सिर्फ पुल की मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा. पुल की खराब स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी है और इसे समय रहते क्यों नहीं बचाया जा सका, इस पर भी सवाल उठने लगे हैं.
वहीं, विक्रमशिला सेतु पर परिचालन बंद करने की तारीख को लेकर भी दोनों नेताओं की राय अलग है. मंत्री 29 अगस्त से पुल पर परिचालन बंद करने की बात कह रहे हैं, जबकि सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भागलपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर छठ पर्व के बाद परिचालन बंद करने और उसके बाद स्टील बैली ब्रिज का निर्माण कराने की मांग की है.
आठ महीने पहले ही सांसद ने विभाग को किया था आगाह
सांसद अजय मंडल का कहना है कि विक्रमशिला सेतु की खराब स्थिति को लेकर करीब आठ माह पहले ही पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर जानकारी दी गयी थी.
उनके अनुसार उस समय पुल को लेकर तकनीकी रिपोर्ट भी तैयार की गयी थी. रिपोर्ट में पुल की जरूरी मरम्मत और तकनीकी खामियों को दूर करने की जरूरत बतायी गयी थी. इसके बावजूद समय रहते जरूरी काम धरातल पर नहीं कराया गया.
सांसद का तर्क है कि अगर भीषण बाढ़ या किसी अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा के कारण पुल को नुकसान पहुंचता तो इसे प्राकृतिक घटना माना जा सकता था. लेकिन पहले से सामने आ चुकी तकनीकी खामियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और बाद में स्थिति गंभीर हुई तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए.
'कागजों पर मरम्मत, जमीन पर तकनीकी सुधार नहीं'
अजय मंडल ने पुल की मरम्मत के लिए उपलब्ध करायी गयी राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाया है. उनका आरोप है कि जरूरी तकनीकी कार्य धरातल पर नहीं हुए.
उन्होंने कार्बन प्लेट, सिंगल और एक्सपेंशन ज्वाइंट समेत पुल के विभिन्न तकनीकी हिस्सों की जांच और मरम्मत का मुद्दा उठाया. सांसद का कहना है कि कागजों पर काम दिखाकर राशि खर्च किये जाने का दावा किया गया, लेकिन वास्तविक तकनीकी सुधार लंबित रहा.
उनके मुताबिक पुल पर लगातार वाहनों का दबाव और कंपन बढ़ने से एक्सपेंशन ज्वाइंट पर भी भार बढ़ता गया. यदि समय रहते तकनीकी खामियों को दूर किया जाता तो हालात इतने गंभीर नहीं होते.
हालांकि, इन आरोपों पर विभागीय स्तर से विस्तृत जवाब सामने आना अभी बाकी है. ऐसे में तकनीकी रिपोर्ट, मरम्मत कार्य और खर्च की वास्तविक स्थिति आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी.
मंत्री बोले- प्राकृतिक घटना का परिणाम
दूसरी ओर बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री और गोपालपुर विधायक बूलो मंडल पुल की क्षति को प्राकृतिक आपदा से जोड़ रहे हैं.
मंत्री के इस बयान ने पुल की स्थिति को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है. एक ओर प्राकृतिक कारण को प्रमुख वजह बताया जा रहा है, वहीं सांसद इसे विभागीय लापरवाही का परिणाम बता रहे हैं.
यही विरोधाभास अब प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि विक्रमशिला सेतु की मौजूदा स्थिति के पीछे वास्तविक तकनीकी और भौतिक कारण क्या हैं.
पुल बंद करने की तारीख पर भी अलग-अलग राय
विक्रमशिला सेतु पर परिचालन बंद करने को लेकर भी मंत्री और सांसद के रुख अलग हैं.
मंत्री बूलो मंडल के अनुसार 29 अगस्त से विक्रमशिला सेतु पर परिचालन बंद कर स्टील बैली ब्रिज के निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा.
वहीं सांसद अजय मंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भागलपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर छठ पर्व के बाद पुल पर परिचालन बंद करने की मांग की है. उनका कहना है कि उसके बाद स्टील ब्रिज का निर्माण कराया जाए.
सांसद के मुताबिक मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने के बीच विक्रमशिला सेतु पर अचानक परिचालन बंद होने से भागलपुर ही नहीं, सीमांचल के बड़े हिस्से की आवाजाही प्रभावित होगी.
एक पुल बंद हुआ तो कहां पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
विक्रमशिला सेतु भागलपुर को उत्तर बिहार और सीमांचल के बड़े हिस्से से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है. रोजाना बड़ी संख्या में वाहन इस पुल से गुजरते हैं.
ऐसे में पुल पर परिचालन बंद होने का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहेगा. मालवाहक वाहनों, यात्रियों, व्यापारियों और दूसरे जिलों से भागलपुर आने-जाने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है.
खासकर मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने पर वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका रहती है. इसलिए पुल बंद करने से पहले वैकल्पिक यातायात व्यवस्था कितनी तैयार है, यह आम लोगों के लिए सबसे अहम सवाल है.
स्टील बैली ब्रिज से मिलेगी कितनी राहत?
पुल पर परिचालन बंद होने के बाद वैकल्पिक स्टील बैली ब्रिज के निर्माण की बात कही जा रही है. लेकिन इसका निर्माण कब शुरू होगा और कब तक पूरा होगा, इसे लेकर फिलहाल अलग-अलग समयसीमा सामने आ रही है.
सांसद चाहते हैं कि छठ के बाद पुल बंद किया जाए और उसके बाद स्टील ब्रिज का निर्माण कराया जाए. इसका उद्देश्य त्योहार के दौरान लोगों की आवाजाही को प्रभावित होने से बचाना है.
अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि पुल की सुरक्षा से समझौता किये बिना लोगों की आवाजाही भी जारी रखी जाए और वैकल्पिक पुल का निर्माण समय पर पूरा हो.
'लाइफलाइन' पुल की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
अजय मंडल ने विक्रमशिला सेतु को भागलपुर और सीमांचल की लाइफलाइन बताते हुए कहा कि इसकी तकनीकी खामियों और रखरखाव को लेकर पहले ही चेतावनी दी गयी थी.
उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो मौजूदा संकट को टाला जा सकता था. उन्होंने कहा कि पुल की स्थिति को केवल प्राकृतिक आपदा बताकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता.
यदि जांच में रखरखाव या तकनीकी निगरानी में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी जोर पकड़ सकती है.
Vikramshila Setu: अब तकनीकी जांच और जवाबदेही पर टिकी नजर
विक्रमशिला सेतु को लेकर सामने आये इन विरोधाभासी बयानों के बीच अब सबसे जरूरी है कि पुल की तकनीकी स्थिति और क्षति के कारणों की स्पष्ट जांच हो. साथ ही यह भी सामने आये कि आठ महीने पहले बतायी गयी तकनीकी खामियों पर क्या कार्रवाई हुई थी.
आम लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल पुल की सुरक्षा और वैकल्पिक आवागमन का है. वहीं प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि पुल बंद करने की स्थिति में भागलपुर और सीमांचल की कनेक्टिविटी प्रभावित न हो.
एक तरफ पुल की सुरक्षा का सवाल है, दूसरी तरफ लाखों लोगों की आवाजाही. ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासनिक फैसला न सिर्फ विक्रमशिला सेतु के भविष्य को तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है.
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