UPI पर शुल्क लगाने की चर्चा से भड़के सिल्क सिटी के व्यापारी, चेंबर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा पत्र

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व्यापारियों के प्रतिनिधि ने बैठक कर जताया डिजिटल पेमेंट पर कर को लेकर आक्रोश. | Prabhat Khabar Network

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केंद्र सरकार द्वारा UPI लेनदेन पर शुल्क या कर लगाने की चर्चाओं से सिल्क सिटी, भागलपुर के व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. डिजिटल भुगतान पर आर्थिक बोझ डालने के संभावित प्रस्ताव के विरोध में व्यापारिक संगठन एकजुट हो गए हैं.

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केंद्र सरकार द्वारा यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर शुल्क या कर लगाने की चर्चाओं के बीच सिल्क सिटी भागलपुर के व्यापारियों और उद्यमियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. डिजिटल भुगतान पर आर्थिक बोझ डालने के संभावित प्रस्ताव के विरोध में व्यापारिक संगठन एकजुट हो गए हैं. ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव को वापस लेने और व्यापारियों की कानूनी व वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

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"यूपीआई पर अतिरिक्त टैक्स डिजिटल भारत की रफ्तार पर लगाएगा ब्रेक"

ईस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष शरद सलारपुरिया ने केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजे पत्र में कहा कि यूपीआई आज देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है:

  • डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर: छोटे-बड़े व्यापारी और आम ग्राहक अब पूरी तरह यूपीआई पर निर्भर हैं. ऐसे में अतिरिक्त कर लगाना डिजिटल इंडिया अभियान को हतोत्साहित करेगा.
  • सॉफ्ट टारगेट न बनाए सरकार: व्यापारी वर्ग पहले से ही जीएसटी, विभिन्न शुल्कों और बढ़ती लागत का सामना कर रहा है. हर व्यवस्था में व्यापारियों को ही सॉफ्ट टारगेट बनाना अनुचित है.

चेंबर नेताओं व उद्यमियों की प्रमुख मांगें

  1. कानूनी संरक्षण और बैंक खाता फ्रीज होने से राहत:
  2. UPI फ्रॉड इंश्योरेंस कवर:
  3. व्यापारियों के लिए सामाजिक व वृद्धावस्था सुरक्षा:
  4. 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन पर टैक्स का विरोध:

सरकार से पुनर्विचार की अपील

चेंबर के पीआरओ राजेश बंका और अन्य व्यापारिक प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह व्यापारियों की वित्तीय, कानूनी और सामाजिक चिंताओं को समझते हुए प्रस्तावित शुल्क के फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करे.


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