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bhagalpur news. स्वामी विवेकानंद के भारत भ्रमण का पहला पड़ाव था भागलपुर

Updated at : 11 Jan 2026 10:06 PM (IST)
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bhagalpur news. स्वामी विवेकानंद के भारत भ्रमण का पहला पड़ाव था भागलपुर

भागलपुर आये थे स्वामी विवेकानंद.

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-अगस्त 1890 में स्वामी अखंडानंद के साथ भागलपुर आये थे स्वामी विवेकानंद, बरारी वाटर वर्क्स के बगल में गंगा तट पर सात दिनों तक किया था चिंतन

दीपक राव, भागलपुरपूरी दुनिया में सनातन धर्म का झंडा बुलंद करने वाले स्वामी विवेकानंद अगस्त 1890 में स्वामी अखंडानंद के साथ भागलपुर आये थे. उनके भारत भ्रमण का पहला पड़ाव भागलपुर ही था. बरारी वाटर वर्क्स के बगल में गंगा तट पर सात दिनों तक संध्या में चिंतन व ध्यान किया था. यहां स्वामी विवेकानंद के नाम से वेदी बनी हुई है, जिस पर स्वामीजी की प्रतिमा स्थापित है.विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के बिहार प्रांत प्रमुख विजय वर्मा ने विवेकानंद केंद्र द्वारा प्रकाशित पुस्तक वांड्रिंग मौंक के हवाले से बताया कि स्वामीजी अगस्त 1890 में स्वामी अखंडानंद के साथ भागलपुर आये थे. जब वे भारत भ्रमण के लिए निकले, तो पहला पड़ाव भागलपुर बनाया. संध्या में उन्होंने हरेक दिन तक बरारी वाटर वर्क्स गंगा तट पर चिंतन व ध्यान किया. भागलपुर के बाद बनारस की ओर रवाना हो गये. तीन साल बाद ही 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद- महासभा में शिरकत करके पूरी दुनिया के आध्यात्मिक विद्वानों को प्रभावित किया. इससे उनके वक्तव्य इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गये. वर्तमान युवा पीढ़ी भी उनसे प्रेरित है.

शिकागो में मशहूर होने के बाद मेजबान को स्वामी विवेकानंद की महत्ता का चला पताटीएनबी कॉलेज में इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ रविशंकर चौधरी ने बताया कि भागलपुर प्रवास में स्वामी विवेकानंद का ठिकाना अंग्रेजी के शिक्षक मनमथनाथ चौधरी का घर बना था. एक वाकया के अनुसार श्री चौधरी अंग्रेजी की पुस्तक पढ़ रहे थे, तो स्वामी जी ने पूछा क्या अंग्रेजी की पुस्तक है. शिक्षक ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जब अंग्रेजी में स्वामी जी ने लेक्चर देना शुरू किया, तो श्री चौधरी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके. जब धर्म संसद में स्पीच देकर स्वामी जी विश्वविख्यात हुए, तो मनमथनाथ चौधरी को उनकी महत्ता का अहसास हुआ. स्वामी जी बनैली स्टेट के जमींदार कुमार नित्यानंद सिंह के यहां भी अतिथि बनकर गये थे. प्रतिदिन गंगा स्नान में करते थे, उस समय की गंगा वहां पर निर्मल थी. बरारी व सैंडिस कंपाउंड आना-जाना सातों दिन तक लगा रहा. सैंडिस कंपाउंड के पूर्वी छोर पर एक प्रतिमा भी स्थापित है.

बगैर निगम के प्रशासन की अनुमति के नहीं पहुंच सकते स्मारक तक

वाटर वर्क्स के समीप आमलोगों के लिए यहां पहुंचने के लिए मार्ग बंद है. उस पवित्र भूमि को वीरान व उपेक्षित छोड़ दिया गया है. स्वामीजी की वेदी तक कोई जाना चाहे, तो उसके लिए निगम प्रशासन से अनुमति लेनी होगी.

आज होंगे विविध आयोजन

बिहार बंगाली समिति, बरारी शाखा की ओर से विभिन्न सामाजिक संगठन की मदद से जयंती पर विविध आयोजन होता है. यहां बच्चे, महिलाएं व प्रबुद्धजनों का जुटान होता है. अध्यक्ष तरुण घोष ने बताया कि इस बार भी आयोजन होगा. इसके अलावा कला केंद्र, स्वाभिमान आदि संगठन की ओर से आयोजन होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KALI KINKER MISHRA

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By KALI KINKER MISHRA

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