सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बना गन्ने की खोई से बना कप-प्लेट

Updated at : 05 May 2024 8:49 PM (IST)
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सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प बना गन्ने की खोई से बना कप-प्लेट

सिंगल यूज प्लास्टिक के कप-प्लेट का विकल्प के रूप में गन्ने की खोई से बनाने लगा कप-प्लेट.

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नवगछिया. भारत में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बाद बिहार में भी गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है. लोग खेतों में गन्ने से रस निकाल लेते हैं, लेकिन उसकी खोई यूं ही बर्बाद हो जाती है. कई लोग इसे खेतों में ही जला देते हैं, जिससे प्रदूषण फैलता है. नवगछिया का रितेश ने गन्ने के खोई से बड़े पैमाने पर कप, प्लेट, कटोरी बनाना शुरू कर दिया है. रितेश गन्ने के वेस्ट को प्रोसेस कर इको फ्रेंडली सामान बनाते हैं. आज उनका दायरा बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व ओडिसा जैसे राज्यों में फैला है. सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगते ही बाजार फिर से खुद को नयी व्यवस्था के अनुरूप ढलने लगा है. बाजार में फिलहाल डिस्पोजेबल थाली, प्लेट, कटोरा इत्यादि उत्पाद पहुंचने लगे हैं. गन्ने की खोई से बने उत्पाद खूबसूरत और टिकाऊ होने से ग्राहक ज्यादा पसंद करने लगे हैं. ग्राहक भी दुकान पर पहुंचते ही सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प पर चर्चा करते हुए नये उत्पाद देखना व खरीदना पसंद कर रहे हैं. रितेश बताते हैं कि गन्ने के खोई, केले थंब, धान की भूसे और सब्जी व फलों के वेस्ट से हम कप बनाते है. इसमें किसी प्रकार का कोई केमिकल उपयोग में नहीं होता है. उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय सबौर से इंटर की पढ़ाई एग्रीकल्चर से की है और वह एग्रीकल्चर में ही अपना भविष्य आजमाना चाहते थे. पारिवारिक दिक्कतों के कारण स्नातक में आर्ट्स लेना पड़ा. यूट्यूब से वीडियो देख कर इस उद्योग को शुरू करने का मन हुआ. इस उद्योग को शुरू किये तीन महीने हो चुके है. इसका बाजार में बहुत अच्छे रिस्पांस मिल रहा है, लोग इसको पसंद कर रहे है. जो शुगर के मरीज होते है बहुत ज्यादा पसंद कर रहे है क्योंकि वह चीनी डाल कर चाय नहीं पीते है और अगर वह गन्ने के खोई से बने कप में चाय पीते है, तो उनको हल्की मिठास का अनुभव होता है. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से छह लाख का लोन लेकर काम की शुरुआत की है. अभी उद्योग में उनकी मां पूरा सहयोग कर रही है. हमारे कप लोकल मार्केट से लेकर अन्य राज्यों में भी जाते हैं.

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