bhagalpur news. फाइलेरिया मुक्त भागलपुर बनाना है हमारी प्राथमिकता : सिविल सर्जन

Published by : NISHI RANJAN THAKUR Updated At : 07 Feb 2026 10:35 PM

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फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए जिलेभर में 10 फरवरी को सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम का शुभारंभ होगा.

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फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए जिलेभर में 10 फरवरी को सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम का शुभारंभ होगा. इसके सफल क्रियान्वयन के लिए शनिवार को सीफार के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग की ओर से मॉडल हॉस्पिटल भागलपुर सभागार में मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. सिविल सर्जन डॉ अशोक प्रसाद ने कहा कि 10 फरवरी को शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को फाइलेरियारोधी दवाएं खिलाना सुनिश्चित किया जायेगा. फाइलेरिया मुक्त भागलपुर बनाना हमारी प्राथमिकता है. आगे उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जायेगा. इसमें बूथ लगा कर समुदाय के सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा खिलायेंगे. इसके अलावा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित है. रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी इस दवा को खिलाना है. सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं. अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली आये, चक्कर जैसे लक्षण होते हैं, तो यह शुभ संकेत हैं. इसका मतलब है कि हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद मर रहे हैं. कोई कठिनाई प्रतीत होती है, तो उससे निपटने के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दीनानाथ ने मीडिया सहयोगियों से संवाद कहा कि सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम में भागलपुर जिला के लगभग 34,81,000 लाभार्थियों को कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डीइसी एवं अल्बेंडाज़ोल कि निर्धारित खुराक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने खिलायी जायेगी. दवाओं का वितरण बिल्कुल भी नहीं किया जायेगा. इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है. दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं खिलायी जायेगी. वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरती कुमारी ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है. यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है. इस मौके पर संयुक्त निदेशक जनसंपर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी कृति कुमारी, जिला जनसंपर्क कार्यालय के अधिकारी, मीडिया सहयोगी के साथ सीफार के जय प्रकाश कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के जिला स्तरीय प्रतिनिधि और जिला फाइलेरिया कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे.

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