खरमनचक में टूटे नाले पर चचरी बनते ही भड़के लोग, 29 लाख की योजना सुनकर माने, 10-15 दिन में पक्के काम का दावा
खरमनचक में टूटे नाले पर चचरी बनते ही भड़के लोग
भागलपुर के खरमनचक में टूटे नाले की समस्या ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया. नगर निगम की टीम द्वारा बांस की चचरी बनाने पहुंचने पर विरोध हुआ. 29 लाख की पक्की निर्माण योजना का आश्वासन मिलने के बाद लोग शांत हुए.
Kharman Chak Drain Construction: भागलपुर खरमनचक की समीर घोष लेन में टूटे नाले ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है. शनिवार को जब नगर निगम की टीम समस्या के तत्काल समाधान के लिए नाले पर बांस की चचरी बनाने पहुंची, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. स्थानीय लोगों ने निगम की टीम का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया.
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लोगों की नाराजगी की वजह सिर्फ टूटा नाला नहीं था. उन्हें डर था कि अगर बांस की चचरी बन गयी, तो निगम इसी अस्थायी व्यवस्था को बहाना बनाकर पक्के निर्माण को टाल देगा. लोगों ने साफ कहा कि उन्हें जुगाड़ नहीं, नाले की दीवार और टूटे ढक्कनों का स्थायी समाधान चाहिए.
काफी देर तक समझाने के बाद निगम अधिकारियों ने जब करीब 29 लाख रुपये की योजना और जल्द पक्के निर्माण का भरोसा दिया, तब स्थानीय लोग शांत हुए. इसके बाद चचरी बनाने की अनुमति दी गयी और शनिवार देर शाम तक अस्थायी रास्ता तैयार कर दिया गया.
चचरी देखते ही क्यों भड़क गये स्थानीय लोग?
डीएन सिंह रोड स्थित समीर घोष लेन में नाले की दीवार का एक हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका है. इसके अलावा नाले की सफाई के दौरान कई जगह ढक्कन भी टूट गये थे.
इस वजह से कई स्थानों पर नाला खुला पड़ा है. स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है.
इसी समस्या को देखते हुए नगर निगम की टीम शनिवार को बांस की चचरी बनाने पहुंची थी. निगम का मकसद था कि जब तक पक्के निर्माण के लिए कांट्रैक्टर का चयन नहीं होता, तब तक लोगों को नाले के ऊपर से सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सके.
लेकिन जैसे ही चचरी का काम शुरू हुआ, स्थानीय लोगों ने इसका विरोध कर दिया.
लोगों को लगा- कहीं फिर न टल जाये पक्का निर्माण
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अस्थायी व्यवस्था बनने के बाद पक्के निर्माण की जरूरत को नजरअंदाज न कर दिया जाये.
लोगों का कहना था कि नाला लंबे समय से क्षतिग्रस्त है. उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए, जो वर्षों तक चले और नाले की समस्या पूरी तरह खत्म करे.
मौके पर निगम के कार्यालय अधीक्षक मो. रेहान अहमद ने लोगों को समझाया कि बांस की चचरी केवल कुछ दिनों के लिए बनायी जा रही है. इसका उद्देश्य पक्के निर्माण तक लोगों की आवाजाही को सुरक्षित रखना है.
उन्होंने बताया कि नाले की दीवार और ढक्कन के पक्कीकरण की योजना को स्वीकृति मिल चुकी है.
29 लाख रुपये से बनेगी नाले की दीवार और ढक्कन
निगम अधिकारियों के अनुसार नाले की क्षतिग्रस्त दीवार और टूटे ढक्कनों के पुनर्निर्माण के लिए करीब 29 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया है.
अब पक्के निर्माण के लिए निविदा जारी की जानी है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांट्रैक्टर का चयन होगा और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा.
निगम अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को 10 से 15 दिनों के भीतर पक्के निर्माण का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया है.
इस आश्वासन के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ. स्थानीय लोगों ने अस्थायी चचरी बनाने की अनुमति दे दी.
शनिवार शाम तैयार हो गयी चचरी
विरोध खत्म होने के बाद निगम की टीम ने चचरी बनाने का काम शुरू किया. शनिवार देर शाम तक नाले के ऊपर बांस की अस्थायी चचरी तैयार कर दी गयी.
अब पक्के निर्माण का काम शुरू होने तक स्थानीय लोगों को इसी रास्ते से आवाजाही की सुविधा मिलेगी. हालांकि लोगों की नजर अब निगम की अगली कार्रवाई पर रहेगी, क्योंकि असली राहत तभी मिलेगी जब 29 लाख रुपये की योजना के तहत नाले की दीवार और ढक्कनों का पक्का निर्माण पूरा होगा.
भवन निर्माण के दौरान ढही थी नाले की दीवार
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार भवन निर्माण के दौरान नाले की दीवार का एक हिस्सा ढह गया था. इसके बाद नाले की सफाई के दौरान कई जगहों पर ढक्कन भी टूट गये.
धीरे-धीरे नाले की स्थिति ऐसी हो गयी कि कई जगह वह खुला और क्षतिग्रस्त दिखाई देने लगा. इससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी होने लगी.
स्थानीय जनप्रतिनिधि की ओर से भी नाले की दीवार और ढक्कनों के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर मेयर और नगर आयुक्त को लगातार पत्र दिये जाते रहे हैं.
Kharman Chak Drain Construction: 23 अगस्त को निगम ने किया था निरीक्षण
समस्या की जानकारी मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने 23 अगस्त को समीर घोष लेन का निरीक्षण किया था.
योजना शाखा प्रभारी मो. रेहान अहमद और आदित्य जायसवाल निगम कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे थे. टीम ने नाले की स्थिति का जायजा लेने के साथ उन स्थानों को चिह्नित किया था, जहां दीवार और ढक्कन का पुनर्निर्माण जरूरी है.
निरीक्षण के बाद अभियंताओं के साथ पक्के निर्माण को लेकर चर्चा की गयी. इसी के आधार पर करीब 29 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया.
अब टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है. अगर तय समय के अनुसार कांट्रैक्टर का चयन हो जाता है, तो लंबे समय से नाले की समस्या झेल रहे समीर घोष लेन के लोगों को जल्द स्थायी राहत मिल सकती है.
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