भागलपुर: 64 करोड़ खर्च के बाद भी इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध से भारी सीपेज, स्पर 8-9 के बीच उभरे बड़े 'रेनकट' ने खोली काम की पोल
सिपेज को बंद करते मजदूर | Prabhat Khabar Network
भागलपुर के नवगछिया क्षेत्र में करोड़ों की लागत से बने इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध की बाढ़ आते ही पोल खुल गई है. 64 करोड़ की योजना के बावजूद स्पर 8-9 के बीच गंभीर सीपेज और रेनकट देखे जा रहे हैं, जिससे तटबंध खतरे में है.
भागलपुर जिले के नवगछिया (गोपालपुर) क्षेत्र अंतर्गत इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर कराए गए करोड़ों रुपये के कटाव निरोधी कार्यों की बाढ़ आते ही पोल खुलने लगी है. स्पर संख्या 8 और 9 के बीच जिस 740 मीटर लंबे हिस्से को गंगा के कहर से बचाने के लिए 64 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, आज उसी हिस्से में कई स्थानों पर भयंकर सीपेज और बड़े-बड़े 'रेनकट' (बारिश से कटाव) दिखाई दे रहे हैं. खतरे के निशान से 61 सेंटीमीटर ऊपर बह रही गंगा का पानी तटबंध के 'टो' (निचले हिस्से) को लगातार छू रहा है. हालात बेकाबू होते देख विभाग ने आनन-फानन में 'फ्लड फाइटिंग' का काम शुरू कर दिया है, लेकिन 64 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी योजना की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
आपके शहर में
64 करोड़ की योजना, काम 'पूरा', फिर भी सीपेज क्यों?
विभाग के रिकॉर्ड में स्पर 8-9 के बीच का काम पूरा दिखाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है:
- एजेंडा संख्या-135: स्पर 8 और 9 के बीच करीब 740 मीटर लंबाई में 64 करोड़ रुपये की लागत से कटाव निरोधी काम हुआ था.
- क्या-क्या हुआ काम: इस योजना के तहत सीट पाइलिंग, बोल्डर एप्रोन, बोल्डर स्लोप और मिट्टी भराई (Earth Filling) का कार्य कराया गया था.
- वर्तमान स्थिति: 28 अगस्त की ताजा स्थिति के अनुसार, इसी सुरक्षित माने जाने वाले हिस्से में तटबंध से पानी का रिसाव (Seepage) हो रहा है और मिट्टी धंसने से रेनकट बन गए हैं, जिससे पूरा तटबंध खतरे की जद में आ गया है.
स्पर 7-8 और 8-9 के लिए बनी थीं अलग-अलग योजनाएं
इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध को बचाने के लिए दो अलग-अलग हिस्सों में करोड़ों का बजट पास हुआ था:
- स्पर 7-8 के बीच (22 करोड़): एजेंडा संख्या-134 के तहत 256 मीटर लंबाई में लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से सीट पाइलिंग, बोल्डर एप्रोन, बोल्डर स्लोप, जियोबैग पिचिंग और मिट्टी भराई कर तटबंध को पुराने स्वरूप में बहाल किया गया था.
- स्पर 8-9 के बीच (64 करोड़): यह योजना अलग थी, जिसका मुख्य उद्देश्य इस बेहद संवेदनशील हिस्से को गंगा के सीधे प्रहार से बचाना था.
लाल निशान से 61 सेमी ऊपर गंगा, जांच के घेरे में कार्य की गुणवत्ता
गंगा के रौद्र रूप ने तटबंध पर भारी दबाव बना दिया है. स्पर-7 पर गंगा का जलस्तर 32.21 मीटर पहुंच चुका है, जो खतरे के निशान (31.60 मीटर) से 61 सेंटीमीटर ऊपर है. करोड़ों खर्च के बाद भी अगर सीपेज हो रहा है, तो कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री, सीट पाइलिंग की गहराई, बोल्डर स्लोप की मोटाई और वास्तविक मापी की तकनीकी जांच बेहद जरूरी हो गई है.
कनीय अभियंता (JE) का बड़ा खुलासा: "मुख्यालय ने काटा था प्राक्कलन"
इस गंभीर लापरवाही और सीपेज के संबंध में पूछे जाने पर, मौके पर फ्लड फाइटिंग का कार्य करा रहे एक कनीय अभियंता (JE) ने नाम न छापने की शर्त पर एक चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया:
"जिस तरफ से सीपेज हो रहा है, विभाग द्वारा उस तरफ किसी तरह का प्रोटेक्शन (बचाव कार्य) नहीं करवाया गया था. हमने स्थानीय स्तर से तैयार प्राक्कलन (Estimate) में 'जियो बैग' से पिचिंग कार्य कराने की अनुशंसा की थी, लेकिन पटना मुख्यालय से इसकी स्वीकृति ही नहीं मिली."
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए