पढ़ाई के साथ खेल क्यों जरूरी? राष्ट्रीय खेल दिवस पर नवगछिया के स्कूल में बच्चों ने दिया खास संदेश

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सावित्री पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय खेल दिवस पर इंडोर खेल प्रतियोगिताएं | Prabhat Khabar Network

राष्ट्रीय खेल दिवस पर नवगछिया के सावित्री पब्लिक स्कूल में बच्चों ने पढ़ाई के साथ-साथ इंडोर खेलों में उत्साह से भाग लिया. इस आयोजन ने खेलों के माध्यम से अनुशासन, एकाग्रता और स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण संदेश दिया.

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National Sports Day 2026: नवगछिया में राष्ट्रीय खेल दिवस पर स्कूल का माहौल शुक्रवार को कुछ अलग नजर आया. कहीं शतरंज की बिसात पर बच्चों ने अगली चाल को लेकर दिमाग लगाया, तो कहीं कैरम और लूडो में जीत के लिए विद्यार्थियों के बीच मुकाबला हुआ. मौका था मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस का.

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नवगछिया के सावित्री पब्लिक स्कूल में इस अवसर पर विभिन्न इंडोर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया. विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और शतरंज, कैरम, लूडो समेत कई मनोरंजक और बौद्धिक खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाई.

कार्यक्रम के दौरान स्कूल परिसर में बच्चों का उत्साह देखने लायक था. प्रतियोगिता में जीत की कोशिश के साथ विद्यार्थियों में एक-दूसरे के प्रति खेल भावना भी नजर आयी.

शतरंज की चाल से लेकर कैरम की बाजी तक

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अलग-अलग इंडोर खेलों में हिस्सा लिया. शतरंज में बच्चों ने अपनी सोच और रणनीति का इस्तेमाल किया, जबकि कैरम और लूडो में भी विद्यार्थियों के बीच मुकाबला हुआ.

इन खेलों ने विद्यार्थियों को पढ़ाई से अलग कुछ समय मनोरंजन और मानसिक सक्रियता के लिए दिया. प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए बच्चों ने अनुशासन और खेल भावना का भी परिचय दिया.

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं था, बल्कि बच्चों को खेलों से जोड़ना भी था.

खेल सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं, दिमाग को भी बनाते हैं सक्रिय

इंडोर गेम्स को लेकर स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों के मानसिक विकास पर भी जोर दिया. शतरंज जैसे खेल बच्चों को सोचने, रणनीति बनाने और अगले कदम का अनुमान लगाने के लिए प्रेरित करते हैं.

वहीं कैरम और दूसरे खेल एकाग्रता, धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. सामूहिक रूप से खेले जाने वाले खेलों के दौरान बच्चों में टीमवर्क और एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल की भावना भी विकसित होती है.

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि बच्चों के लिए खेल और शिक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए. खेल गतिविधियां पढ़ाई के साथ बच्चों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

राष्ट्रीय खेल दिवस पर बच्चों को मिला खेल का संदेश

मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को खेलों के महत्व के बारे में बताया गया. बच्चों को संबोधित करते हुए कहा गया कि खेल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा हैं.

पढ़ाई के साथ खेलकूद में भाग लेने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होता है. खासकर इंडोर खेल विद्यार्थियों की एकाग्रता, सोचने-समझने की क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की योग्यता को मजबूत करने में मदद करते हैं.

शिक्षकों ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने और प्रतियोगिताओं में सकारात्मक खेल भावना के साथ शामिल होने के लिए प्रेरित किया.

खेल में जीत से ज्यादा जरूरी है खेल भावना

प्रतियोगिताओं के दौरान विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. बच्चों ने जीत के लिए अपनी पूरी क्षमता लगायी, लेकिन साथ ही एक-दूसरे के साथ खेल भावना भी बनाए रखी.

स्कूल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि खेल में केवल जीतना ही लक्ष्य नहीं होता. अनुशासन, धैर्य, नियमों का पालन और हार-जीत को स्वीकार करना भी खेल का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर आयोजित गतिविधियों से स्कूल परिसर में पूरे दिन उत्साह और आनंद का माहौल बना रहा.

National Sports Day 2026: बच्चों के लिए खेल और पढ़ाई का संतुलन क्यों जरूरी?

लगातार पढ़ाई के बीच खेल बच्चों को मानसिक रूप से सक्रिय और तरोताजा रखने का माध्यम बन सकते हैं. इंडोर गेम्स का फायदा यह है कि इनके लिए बड़े मैदान या विशेष मौसम की जरूरत नहीं होती.

विद्यालय में आयोजित प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ अपनी एकाग्रता, धैर्य, निर्णय लेने की क्षमता और टीमवर्क को आजमाने का अवसर मिला.

सावित्री पब्लिक स्कूल के इस आयोजन में विद्यार्थियों ने खेलों के माध्यम से स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया.

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