भागलपुर : शहर में डेंगू का डंक, नगर निगम को मतलब नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Oct 2018 9:27 AM

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दो ही फॉगिंग मशीन ठीक, 11 है खराब फाॅगिंग मामले में नगर निगम गंभीर नहीं भागलपुर : शहर में डेंगू के मच्छर घूम रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डेंगू के मरीज आने लगे हैं. लेकिन शहर के लोगों के प्रति निगम पूरी तरह लापरवाह है. निगम द्वारा फॉगिंग मशीन की खरीद […]

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दो ही फॉगिंग मशीन ठीक, 11 है खराब
फाॅगिंग मामले में नगर निगम गंभीर नहीं
भागलपुर : शहर में डेंगू के मच्छर घूम रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डेंगू के मरीज आने लगे हैं. लेकिन शहर के लोगों के प्रति निगम पूरी तरह लापरवाह है. निगम द्वारा फॉगिंग मशीन की खरीद की गयी थी. यह खरीद आठ साल पहले की गयी.
लेकिन इन आठ साल में एक माह भी कभी भी लगातार छिड़काव नहीं किया गया. स्थिति अभी यह है कि उचित रख-रखाव और मशीन के नहीं चलने के कारण हाथ से चलाने वाली 12 मशीन में एक ठीक है बाकी ग्यारह मशीन खराब है. वहीं एक बड़ी मशीन है, जिससे शहर के मुख्य मार्ग में छिड़काव किया जाता है. लेेकिन पूरे मुख्य मार्ग ने नहीं किया जाता है. अधिकारियों के रहने वाले मार्ग में पहले किया जाता है.
पिछले डेढ़ माह से नहीं हुआ है छिड़काव, विभाग को आदेश का इंतजार
महीने की बात दूर, सप्ताह में भी नहीं होता है छिड़काव
निगम द्वारा इस मशीन का कभी भी सही तरह से उपयोग नहीं हुआ. निगम ने कभी गंभीरता से नहीं लिया. आठ साल होने को आये छिड़काव को लेकर रोस्टर ही नहीं बना.
कभी भी बैठक में यह मुद्दा विवाद का कारण नहीं बना
निगम के स्थायी समिति और सामान्य बोर्ड की बैठक में हर बार पार्षद कई मुद्दे बड़ी गंभीरता से लाते हैं,लेकिन शहर में मुख्य मार्ग और वार्ड की गलियों में फॉगिंग का छिड़काव नहीं किया गया. लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर पार्षद कभी गंभीर होकर चर्चा नहीं की.
बड़ी मशीन को एक घंटा चलाने में 60 लीटर डीजल की खपत
सबसे बड़ी बात यह है कि बड़े मशीन को एक घंटा चलाने में 60 लीटर डीजल और आठ लीटर पेट्रोल खपत होता है. वहीं छोटे मशीन को चलाने में पांच लीटर डीजल और दो लीटर पेट्रोल की खपत होती है.
भागलपुर : जिले के लोग लगातार डेंगू और मलेरिया के शिकार हो रहे हैं, लेकिन मलेरिया विभाग अब तक एक्शन में नहीं आया है. कुछ दिन पहले शहर में छिड़काव करने का प्रयास तब विफल हो गया जब पटना से आदेश आया कि अभी इसका समय नहीं है इसलिए इस कार्य को बंद कर दिया जाये. अब विभाग लगातार फैल रही बीमारी के बीच पटना से निर्देश आने का इंतजार कर रहा है. विभाग के कर्मचारी जय प्रकाश लाल और राजीव कुमार रंजन ने बताया कि हमारे जिले को मलेरिया जोन में नहीं रखा गया है. यहां कालाजार की रोक थाम के लिए छिड़काव किया जाता है.
साल में चार माह मार्च, मई, अगस्त और अक्तूबर में छिड़काव किया जाता है. 10 दिनों तक पिछले दिनों छिड़काव किया गया. इस बीच पटना से आदेश आया कि इस कार्य को रोक दिया जाये. अब अगले आदेश का इंतजार किया जा रहा है. डेंगू और मलेरिया को लेकर किसी तरह का छिड़काव नहीं किया जाता है.
एक और डेंगू के मरीज की हुई पहचान
मायागंज अस्पताल में शनिवार को एक और डेंगू मरीज की जांच के बाद उसे पीड़ित पाया गया. विकास कुमार का आज मायागंज अस्पताल के पैथोलॉजी में जांच की गयी, जिसमें डेंगू की पुष्टि हो गयी. उसे मेडिसिन विभाग से ट्रामा विभाग रेफर कर दिया गया. देर शाम तक मरीज ट्रामा वार्ड नहीं आया था. दूसरे जिले से भी डेंगू के मरीज मायागंज अस्पताल में आ रहे हैं.
जांच पूर्व सभी को मेडिसिन विभाग में रखा जा रहा है, जिससे यहां भर्ती सामान्य रोग के शिकार मरीज को भी डेंगू होने का खतरा उत्पन्न हो गया है. डेंगू वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए आज भी कोई व्यवस्था नहीं हो सकी. अस्पताल प्रबंधन ने यहां पहले से रह रहे मरीजों को हटा कर वार्ड को साफ कर दिया है, लेकिन यहां की खिड़की का शीशा टूटा है. बेड के पास मच्छरदानी नहीं है. ऐसे में मरीज और इनके परिजनों को परेशानी से दो चार होना पड़ेगा.
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