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आयुष्मान भारत योजना में पंजीयन से मना करने पर होगी कार्रवाई

Updated at : 02 Oct 2018 7:45 AM (IST)
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आयुष्मान भारत योजना में पंजीयन से मना करने पर होगी कार्रवाई

भागलपुर : आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अगर कोई अस्पताल मरीजों का पंजीयन करने से मना कर देता है तो सरकार कठोर कार्रवाई करने को विवश हो जायेगी. सरकार के आदेश में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति यह योजना से जुड़ा है उसे हर हाल में इसका लाभ दिया जाना चाहिए. इस बाबत […]

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भागलपुर : आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अगर कोई अस्पताल मरीजों का पंजीयन करने से मना कर देता है तो सरकार कठोर कार्रवाई करने को विवश हो जायेगी. सरकार के आदेश में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति यह योजना से जुड़ा है उसे हर हाल में इसका लाभ दिया जाना चाहिए. इस बाबत बताया जा रहा है कि सदर में अब तक इस योजना से लाभ पाने के लिए 18 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया है.
जबकि मायागंज अस्पताल में अब तक मात्र 6 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन किया है. दोनों अस्पताल से एक एक मरीजों का ऑपरेशन किया गया है. दूसरी और अस्पताल में बने काउंटर में मरीज और इनके परिजनों की भीड़ लगी रही. लोग लगातार इस योजना को लेकर जानकारी मांग रहे थे.
ब्रांकोस्कोप मशीन : श्वास संबंधित मरीजों के लिए यह मशीन वरदान है. खास तौर पर दमा मरीजों का बेहतर इलाज इस मशीन से किया जा सकता है. लेकिन दो साल पहले खरीदी गयी यह मशीन आज बेकार पड़ी है. पटना से मशीन को चलाना सिखाने के लिए इंजीनियर तो आये लेकिन इसके बाद यह अस्पताल में किसी मरीज के काम नहीं आया.
वेंटिलेटर : ऐसे मरीज जो जीवन और मौत के लड़ रहे है. उनको कृत्रिम सांस के दम पर जीवन देने के लिए वेंटिलेटर अस्पताल में लाया गया था. लाखों की लागत पर दो साल पहले इस मशीन को खरीद कर लाया गया था. छह माह तक इसका प्रयोग यहां किया गया जिसके बाद इसे आइसीयू में रख दिया गया. जिसके बाद आज तक इसका समुचित प्रयोग नहीं हो पा रहा है.
वेन व्यूअर मशीन : हादसे का शिकार होकर जब मरीज अस्पताल आता है तो सबसे बड़ी परेशानी नब्ज को खोजने में आती है. परेशानी से बचने के लिए इस मशीन काे खरीदा गया था. इसकी सहायता से स्लाइन से लेकर इंग्जेक्शन, कैथेटर लगाया जा सके . एक दर्जन मशीन अस्पताल में खरीदा गया था. कुछ दिन इस्तेमाल होने के बाद अब यह प्रयोग में नहीं आ रहा है.
इंफ्यूजन पंप : इस मशीन से मरीजों के नस ने दवा देने के लिए प्रयोग होता है. दो साल पहले अस्पताल में करीब दो दर्जन मशीन खरीदा गया था. इसे आइसीयू में रखा गया था. लेकिन आज यह कहा है इसकी जानकारी किसी को नहीं है.
एबीजी मशीन : एक्सीडेंट में घायल हुए मरीजों के खून में ऑक्सीजन मापने वाली इस मशीन की खरीद करीब तीन से चार साल पहले की गयी थी. तीन मशीनों में से एक मशीन का इस्तेमाल तो किसी तरह से किया जा रहा है. लेकिन आइसीयू में रखी दो एबीजी मशीन अभी भी बेकार पड़ी है.
मेडिसिन से अलग हुआ टीबी विभाग : स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर सोमवार को मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग से टीबी एंड चेस्ट विभाग को अलग कर दिया गया. अब टीबी विभाग अपना अलग यूनिट चलायेगा. इस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ डीपी सिंह हैं. सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि टीबी एवं चेस्ट विभाग, गैस्टोइंनट्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और न्यूरोलाॅजी विभाग को स्वतंत्र किया जाये. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ हेमंत कुमार सिन्हा ने बताया कि मेडिसिन विभाग में कई शिक्षकों को प्राध्यापक बनाया गया है.
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