संजय जायसवाल के नोटिस पर विशेषाधिकार समिति में पहुंचा मामला, राहुल गांधी को देना होगा स्पष्टीकरण

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सांसद डॉ. संजय जायसवाल की फाइल फोटो

राहुल गांधी को विशेषाधिकार हनन नोटिस पर जवाब देना होगा. पश्चिम चंपारण सांसद संजय जायसवाल के नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष ने संज्ञान लिया है. विशेषाधिकार समिति ने 28 अगस्त तक स्पष्टीकरण मांगा है.

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सांसद संजय जायसवाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अब राहुल गांधी को अपना स्पष्टीकरण देना होगा. पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने इस टिप्पणी को सांसद की गरिमा और संसद की मर्यादा के उल्लंघन का मामला बताते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था. लोकसभा अध्यक्ष ने डॉ. जायसवाल के नोटिस पर संज्ञान लेते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति के समक्ष भेज दिया है. समिति ने राहुल गांधी को 28 अगस्त तक अपना स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया है.

विशेषाधिकार समिति के सामने रखना होगा पक्ष

समिति की ओर से राहुल गांधी को मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है. उन्हें 28 अगस्त तक अपना स्पष्टीकरण देना होगा. इसके बाद समिति मामले से जुड़े तथ्यों और स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर विचार करेगी. संसदीय विशेषाधिकार से जुड़े मामलों में समिति संबंधित पक्षों को सुनने के बाद अपनी सिफारिश तय करती है.

पश्चिम चंपारण सांसद ने दिया था नोटिस

डॉ. संजय जायसवाल ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था. उन्होंने कहा था कि टिप्पणी से सांसद की गरिमा और संसद की मर्यादा प्रभावित हुई है. उनके नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद मामला अब विशेषाधिकार समिति तक पहुंच गया है.

लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर जताया आभार

मामले को समिति के पास भेजे जाने पर डॉ. संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि उनके नोटिस पर संज्ञान लेते हुए संसदीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है. सांसद ने कहा कि संसद की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है.

उचित कार्रवाई का जताया भरोसा

डॉ. जायसवाल ने विश्वास जताया कि विशेषाधिकार समिति मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उचित कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि संसद में राजनीतिक मतभेद और विचारों का विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सांसदों को संसदीय भाषा, परंपराओं और सदन की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में समिति की प्रक्रिया के बाद ऐसा स्पष्ट संदेश जाएगा कि संसद की मर्यादा से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता. साथ ही भविष्य में कोई भी सांसद ऐसी टिप्पणी करने से बचेगा, जिससे संसद की गरिमा या किसी सांसद की प्रतिष्ठा प्रभावित हो.

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गणेश वर्मा

लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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