खंडहर बन खड़ी हैं शहर में जर्जर इमारतें, दिल्ली हादसे के बाद भी सबक नहीं ले रहा नगर निगम

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दिल्ली हादसे के बाद भी बेतिया में जर्जर इमारतों को लेकर निगम गंभीर नहीं है। शहर के कई व्यस्त इलाकों में खंडहरनुमा भवन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

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बेतिया न्यूज: दिल्ली में जर्जर इमारत गिरने की घटना ने भले ही देशभर में पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी हो, लेकिन बेतिया शहर में खतरनाक स्थिति में खड़ी इमारतें अब भी सवाल खड़े कर रही हैं. शहर के कई व्यस्त इलाकों में पुराने और जर्जर मकान लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही के बीच खड़े हैं. इनमें राजगुरु चौक की स्थिति विशेष रूप से चिंता बढ़ाने वाली है.

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राजगुरु चौक में शिक्षण संस्थान के पास ही जर्जर मकान

राजगुरु चौक शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में शामिल है. वार्ड नंबर 8 में जर्जर स्थिति में खड़ा मकान सड़क से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ है. आसपास बैंक, किताब की दुकान, कोचिंग संस्थान और कंप्यूटर सेंटर संचालित होते हैं. क्रिएटिव कंप्यूटर एंड डिजिटल लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंचते हैं. सुबह से शाम तक राहगीरों और ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. ऐसे में मकान का कोई हिस्सा अचानक गिरा तो इसकी चपेट में आने वालों की संख्या अधिक हो सकती है.


शहर के दूसरे बाजारों में भी पुराने भवन

राजगुरु चौक अकेला ऐसा इलाका नहीं है, जहां पुराने भवनों की स्थिति चिंता का कारण बन सकती है. मीना बाजार, लाल बाजार, सोवा बाबू चौक, तीन लालटेन चौक, जनता सिनेमा रोड, अस्पताल रोड, स्टेशन चौक, बसवरिया रोड और अन्य व्यस्त बाजारों में भी पुराने भवन और निर्माण दिखाई देते हैं. कई जगहों पर दुकानें और प्रतिष्ठान जर्जर भवनों के आसपास या उन्हीं भवनों में संचालित हो रहे हैं.


मलबा गिरने की शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

राजगुरु चौक के जर्जर मकान को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है. लोगों का कहना है कि भवन की हालत काफी खराब है और समय-समय पर मलबा गिरने की स्थिति बनी रहती है. इसके बावजूद भवन की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया गया है. लोगों का सवाल है कि जब किसी भवन की स्थिति खतरनाक नजर आ रही है तो नगर निगम की ओर से उसका निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई कब होगी?


सरकारी कार्यालय भी सवालों के घेरे में

चिंता सिर्फ निजी भवनों तक सीमित नहीं है. शहर में कई सरकारी कार्यालय भी ऐसी पुरानी इमारतों में संचालित हो रहे हैं, जिनकी स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. इन कार्यालयों में रोज कर्मचारी, अधिकारी और आम लोग पहुंचते हैं. ऐसे में सरकारी भवनों की भी नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट जरूरी है.

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