बगहा में राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर बैठक, 12 सितंबर को अधिक से अधिक मामलों के निपटारे पर जोर
बगहा में 12 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस बैठक में यातायात चालान और वन विभाग के करीब 1075 लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया गया.
West Champaran News: बगहा. आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को लेकर मंगलवार को व्यवहार न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में यातायात से जुड़े विभिन्न चालान मामलों के अधिकाधिक निस्तारण और सुलहनीय वादों को लोक अदालत के माध्यम से समाप्त कराने पर जोर दिया गया. साथ ही न्यायालय में लंबित वन विभाग के मामलों को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये गये.
12 सितंबर की लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों के निपटारे पर जोर
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर आपसी समन्वय जरूरी है. अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों को चिह्नित कर लोक अदालत में लाने और उनका त्वरित निस्तारण कराने पर चर्चा हुई.
न्यायिक अधिकारियों ने विभागों से आवश्यक तैयारी समय से पूरी करने को कहा, ताकि लोक अदालत के दिन मामलों के निपटारे में किसी तरह की परेशानी नहीं हो.
ट्रैफिक चालान मामलों के निस्तारण की तैयारी
एडीटीओ साक्षी कुमारी ने बताया कि यातायात से संबंधित विभिन्न प्रकार के चालान मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत में लाकर निस्तारित किया जाएगा. इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारी करने का निर्देश दिया गया है.
अधिक से अधिक वाहन मालिकों और चालानधारियों को लोक अदालत की जानकारी देने तथा उन्हें मामलों के निपटारे के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया.
वन विभाग के करीब 1075 मामले लंबित
बैठक के दौरान न्यायालय में वन विभाग से जुड़े लंबित मामलों की स्थिति पर गंभीर चर्चा हुई. बताया गया कि न्यायालय में वन विभाग के करीब 1075 मामले लंबित हैं.
इस पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मनीष द्विवेदी ने नाराजगी जतायी. उन्होंने सभी वन क्षेत्र पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों के निष्पादन के लिए गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करायी जाए.
गवाही में देरी से वर्षों तक लंबित रहते हैं मामले
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने कहा कि गवाहों की समय पर उपस्थिति नहीं होने के कारण कई मामले लंबे समय तक लंबित रहते हैं. इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है.
उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से लंबित मामलों के निष्पादन में गंभीरता दिखाने और गवाहों की उपस्थिति को लेकर प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने को कहा.
डीएफओ के प्रतिनिधि नहीं पहुंचने पर कोर्ट नाराज
बैठक में वन प्रमंडल एक के डीएफओ शिखर प्रधान की ओर से किसी प्रतिनिधि के उपस्थित नहीं होने पर भी न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया. बैठक में न तो डीएफओ की ओर से कोई अधिकारी पहुंचा और न ही लंबित मामलों की सूची उपलब्ध करायी गयी.
इस पर न्यायालय ने गंभीर नाराजगी व्यक्त की. रघिया के रेंजर को भी मामले को लेकर फटकार लगायी गयी और लंबित मामलों के निष्पादन में जवाबदेही तय करने की बात कही गयी.
विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
न्यायिक अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों को चिह्नित करने की अपील की. उद्देश्य है कि 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का त्वरित निपटारा किया जा सके.
बैठक में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम मनीष द्विवेदी, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम कीर्ति प्रसाद, एसडीजेएम आलोक कुमार चतुर्वेदी और एडीटीओ साक्षी कुमारी समेत यातायात, ट्रैफिक और वन विभाग के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे.
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