डकैती मामले में नेपाली नागरिक को 10 साल की सजा, 13 साल जेल काट चुका है दोषी

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सांकेतिक AI तस्वीर

Bettiah Court News: 2012 के बहुचर्चित डकैती और बमबाजी मामले में अदालत ने नेपाली नागरिक रमेश यादव को 10 साल कारावास की सजा सुनाई है. हालांकि आरोपी वर्ष 2013 से जेल में बंद है और करीब 13 साल कारावास में बिता चुका है. पढ़ें पूरी खबर..

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पश्चिम चंपारण से मनोज राव की रिपोर्ट

Bettiah Court News: पश्चिम चंपारण की अदालत ने करीब 14 वर्ष बाद बहुचर्चित डकैती और बमबाजी मामले में अपना फैसला सुनाया है. नेपाल के नागरिक रमेश यादव को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है. हालांकि, मामले का सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलू यह है कि आरोपी वर्ष 2013 से जेल में बंद है और अब तक लगभग 13 वर्ष कारावास में बिता चुका है.

अदालत के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर आरोपी की रिहाई की संभावना को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

अदालत ने सुनाई 10 साल की सजा

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार की अदालत ने रमेश यादव को डकैती और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही प्रत्येक मामले में 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

अदालत ने आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत तीन वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई है.

सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी

अदालत ने आदेश दिया है कि आरोपी को दी गई सभी सजाएं साथ-साथ (Concurrent) चलेंगी. ऐसे में कुल प्रभावी सजा 10 वर्ष की ही मानी जाएगी.

कानूनी जानकारों के अनुसार, आरोपी पहले ही सजा की निर्धारित अवधि से अधिक समय जेल में बिता चुका है. ऐसे में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है.

क्या है पूरा मामला

अभियोजन के अनुसार, 12-13 सितंबर 2012 की रात रमेश यादव अपने साथियों के साथ शिकारपुर थाना क्षेत्र के गोबर्धना केहुनिया गांव स्थित एक घर में घुस गया था.

आरोप है कि अपराधियों ने परिवार के सदस्यों को हथियार के बल पर बंधक बनाया और लाइसेंसी राइफल, दुनाली बंदूक तथा जेवरात लूट लिए. घटना के दौरान इलाके में दहशत फैलाने के लिए गोलीबारी और बमबाजी भी की गई थी.

मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की थी और बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

14 साल बाद आया फैसला

वर्ष 2012 में हुई घटना और उसके बाद चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने अपना फैसला सुनाया है. फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि दोषी को मिली सजा से अधिक अवधि वह पहले ही जेल में बिता चुका है.

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