Barauni Dairy: सात निश्चय-3 के तहत पशु प्रबंधन पर कार्यशाला, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

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कार्यक्रम को संबोधित करते बरौनी डेयरी प्रबंधक | Prabhat Khabar Network

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बरौनी डेयरी ने सात निश्चय-3 योजना के तहत दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया. इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और पशु प्रबंधन को वैज्ञानिक बनाना था. कार्यशाला में पशु आहार, स्वास्थ्य, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और सरकारी योजनाओं के लाभों पर विस्तार से चर्चा हुई.

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Barauni Dairy: देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, बरौनी के तत्वावधान में बुधवार को खगड़िया के बछोटा स्थित राज कौशल रिसॉर्ट में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सात निश्चय-03 के अंतर्गत गठित दुग्ध सहयोग समितियों के अध्यक्षों एवं सचिवों के क्षमता संवर्धन और तकनीकी प्रशिक्षण के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला का संचालन संघ के प्रबंध निदेशक रविंद्र कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. कार्यशाला में खगड़िया और महेशखूंट क्षेत्र की प्राथमिक दुग्ध सहयोग समितियों के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.

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किसान कल्याण और आय वृद्धि पर केंद्रित विमर्श

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए प्रबंध निदेशक रविंद्र कुमार ने कहा कि "दुग्ध उत्पादक किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण और आय में निरंतर वृद्धि के लिए दुग्ध संघ पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है." उन्होंने बायोगैस योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), कम लागत में उन्नत पाड़ी क्रय योजना, सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक तथा 'सुधा सखी' योजना के लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पशुओं का वैज्ञानिक प्रबंधन, उन्नत पोषण, नस्ल सुधार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन ही किसानों की आय दोगुनी करने का वास्तविक आधार हैं.

वैज्ञानिक पशु प्रबंधन और पोषण की तकनीक

प्रशिक्षण सत्र में पशु विशेषज्ञों ने दुग्ध उत्पादक किसानों को पशु आहार और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए. पशुओं को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुसार संतुलित आहार देने, नियमित कृमिनाशी दवा पिलाने और समय पर टीकाकरण कराने की आवश्यकता बताई गई. विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन और मौसमी बदलाव के दौरान पशु प्रबंधन पर जोर देते हुए छायादार, हवादार आवास और स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपाय समझाए गए, ताकि मौसमी बीमारियों से दुग्ध उत्पादन प्रभावित न हो.

स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण

कार्यशाला में उपभोक्ताओं के विश्वास और बेहतर मूल्य प्राप्ति के लिए स्वच्छ दुग्ध उत्पादन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया. अधिकारियों ने दुग्ध दोहन से लेकर समिति केंद्र पर संग्रहण तक स्वच्छता के तय मानकों का पालन करने के निर्देश दिए. समिति स्तर पर दूध की जांच और वजन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सचिवों को आधुनिक परीक्षण मशीनों के सही संचालन, नियमित कैलिब्रेशन और रखरखाव की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई.

मजबूत सहकारिता से सशक्त होंगे ग्रामीण किसान

सहकारी समितियों को पारदर्शी, जवाबदेह और किसान-हितैषी बनाने के लिए अध्यक्ष एवं सचिवों के आपसी समन्वय पर जोर दिया गया. इस अवसर पर प्रबंधक परियोजना एच.एस. त्रिपाठी, प्रबंधक (प्रापण) डॉ. संजीव कुमार सिंह, दोनों प्रभागों के क्षेत्र प्रभारी, पशु चिकित्सक और प्रशिक्षण केंद्र के संयोजकों ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया. अंत में पदाधिकारियों ने सरकारी योजनाओं और तकनीकी लाभों को गांव के अंतिम दुग्ध उत्पादक किसान तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने का साझा संकल्प लिया.

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