बेगूसराय : छौड़ाही में 2 घंटे की बारिश से अमारी की सड़क झील में तब्दील, अतिक्रमण-नाला नहीं होना बड़ी वजह
छौड़ाही के अमारी धन्नूटोल से छोटी मस्जिद तक सड़क पर जमा बरसाती पानी.
बेगूसराय के छौड़ाही प्रखंड में दो घंटे की बारिश से मुख्य और ग्रामीण सड़कें झील में तब्दील हो गई हैं. अमारी धन्नूटोल से छोटी मस्जिद तक सड़क पर जलजमाव और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं. ग्रामीणों ने सड़क किनारे अतिक्रमण और नाले के अभाव को इसका मुख्य कारण बताते हुए प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है.
बेगूसराय के छौड़ाही प्रखंड क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही मानसूनी बारिश ने ग्रामीण और शहरी सड़क व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. पिछले दिनों हुई महज दो घंटे की तेज मूसलाधार बारिश ने स्थिति को और बदतर बना दिया है, जिसके बाद से प्रखंड की अधिकांश मुख्य और ग्रामीण सड़कों पर झील जैसा नजारा देखने को मिल रहा है.
लगातार बरसाती पानी जमा रहने के कारण पक्की (पीचिंग) सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई हैं.
वर्तमान में स्थिति यह है कि कई जगहों पर घुटने भर पानी जमा है, जो राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बन चुका है. लोग हर पल डर के साये में आवागमन करने को मजबूर हैं.
प्रमुख मार्गों की जर्जर स्थिति और जलजमाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरे क्षेत्र में सबसे दयनीय स्थिति दौलतपुर-मालीपुर मुख्य पथ की बनी हुई है. इस मार्ग पर बखड्डा धुनिया टोल, पुरानी यूको बैंक शाखा चौक और पंचायत भवन सावंत के पास सड़क पूरी तरह टूट चुकी है. वहीं, बखड्डा-गुआवाड़ी पथ के नारायणपीपर मोड़ तथा ऐजनी-थुम्बा से डुमरी-परोड़ा पथ पर भी पीचिंग उखड़ चुकी है. इन इलाकों में हल्की बारिश होने पर भी कई-कई दिनों तक पानी भरा रहता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि समूचे प्रखंड में सबसे खतरनाक और बदतर स्थिति चौफेर-सिहमा पथ के अमारी धन्नूटोल से लेकर छोटी मस्जिद अमारी तक की है. यहां जगह-जगह जमा बरसाती पानी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो सड़क का वजूद ही किसी झील में तब्दील हो गया हो. ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें इसी नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ता है.
अतिक्रमण और नाले का अभाव बना मुख्य वजह
ग्रामीणों के अनुसार, सड़कों पर हर बार होने वाले इस भयंकर जलजमाव का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक उदासीनता के साथ-साथ बड़े पैमाने पर हुआ अतिक्रमण और सड़क किनारे पक्के नाले का निर्माण न होना है.
सड़क के दोनों ओर लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है, जिससे बरसाती पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है. नतीजा यह होता है कि भारी लागत से बनी चकाचक सड़कें जलजमाव की मार झेलकर कुछ ही महीनों में जर्जर हो जाती हैं.
इसके बावजूद न तो स्थानीय प्रशासन अतिक्रमणकारियों पर कोई सख्ती दिखा रहा है और न ही संबंधित पथ निर्माण विभाग सड़कों की मरम्मत की दिशा में कोई पहल कर रहा है.
ग्रामीण नवीन कुशवाहा, अरविंद महतो, सहदेव महतो, रामपुकार महतो, अरुण पासवान, नवीन कुमार राय, निगम कुमार, जावेद अली रजा, मो. शादाब, जमशेद आलम, फिरोज आलम, अमिताभ बच्चन पटेल, शाकिब आलम, अरुण कुशवाहा, वीरेश्वर महतो और बालेश्वर महतो सहित अन्य लोगों ने रोष प्रकट करते हुए बताया कि दशकों से चली आ रही जल-निकासी की अव्यवस्था से वे पहले ही त्रस्त हैं.
उन्होंने कहा कि इस मानसून सीजन में सामान्य से बहुत कम बारिश हुई है, लेकिन फिर भी खेतों की बजाय बरसात का सारा पानी मुख्य सड़कों पर जमा हो रहा है. पानी के लंबे समय तक जमा रहने से सड़कें टूटकर गड्ढों में बदल रही हैं, जिसका खामियाजा आम जनता और चालकों को भुगतना पड़ रहा है.
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब अतिक्रमण हटाने और पथ निर्माण विभाग से जर्जर हो चुकी सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है.
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