बेगूसराय : बाढ़ राहत के दावों के बीच स्कूल में शरण लिए 45 परिवार, भोजन के लिए एक किमी दूर जाने की मजबूरी

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विद्यालय में शरण लिए बाढ़ पीड़ित  | Prabhat Khabar Network

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बेगूसराय में बाढ़ राहत के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है. चमथा-3 पंचायत के करीब 45 परिवार एक स्कूल में शरण लिए हुए हैं, लेकिन उन्हें भोजन के लिए 1 किलोमीटर दूर सुनसान रास्ते से जाना पड़ रहा है, जहां कई बार भोजन भी नहीं मिल पाता.

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बेगूसराय जिले में बाढ़ की विभीषिका के बीच सरकार और प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक किचन, शुद्ध पेयजल, पशुचारा और प्लास्टिक शीट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं. लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रही है.

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चमथा-3 पंचायत के चक्की गांव के करीब 45 परिवार के 150 विस्थापित लोग पिछले करीब एक सप्ताह से विद्यापतिनगर प्रखंड के साहिट पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय हिरामण टोल वरई टोल में अपने परिवार और पशुओं के साथ शरण लिए हुए हैं.

दूरी और सुनसान रास्ता

विस्थापितों का आरोप है कि अब तक यहां किसी भी तरह की समुचित सरकारी राहत व्यवस्था नहीं पहुंची है. विस्थापितों के अनुसार प्रशासन की ओर से उन्हें दस नंबर ढाला स्थित सामुदायिक किचन में जाकर भोजन करने को कहा गया, लेकिन शरणस्थल से किचन की दूरी करीब एक किलोमीटर है.

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बीच का रास्ता सुनसान बताया जा रहा है, जिससे बच्चों, महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए रोजाना वहां तक जाकर भोजन करना बड़ी परेशानी बन गया है.

भोजन न मिलने की शिकायत

स्थानीय विस्थापित अमरजीत कुमार, मोहित कुमार और रोहित कुमार समेत कई लोगों ने बताया कि जब वे सामुदायिक किचन पहुंचे तो कई बार उन्हें पत्ता तो दिया गया, लेकिन भोजन नहीं मिला. उनका कहना है कि किचन से यह कहकर लौटा दिया गया कि भोजन खत्म हो गया है. ऐसे में विस्थापित परिवार अपनी व्यवस्था से किसी तरह गुजारा करने को मजबूर हैं.

प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

सरकारी रिकॉर्ड में राहत केंद्र और सामुदायिक किचन चल रहे हैं, लेकिन जमीन पर शरण लिए विस्थापित भोजन के लिए भी भटक रहे हैं.

अगर किसी शरणस्थल पर एक सप्ताह से लोग रह रहे हैं और वहां सामुदायिक किचन, पर्याप्त भोजन, पेयजल, पशुचारा व अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं पहुंचतीं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

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अधिकारी व जनप्रतिनिधि का पक्ष

इस संबंध में अंचल अधिकारी प्रीतम कुमार गौतम ने बताया कि मुसहरी गाछी साहिट और दस नंबर ढाला दो स्थानों पर सामुदायिक किचन संचालित किए जा रहे हैं, जहां विस्थापित लोग जाकर भोजन कर सकते हैं.

वहीं, चमथा-3 के मुखिया प्रतिनिधि शिबू राउत का कहना है कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय हिरामण टोल साहिट में पहले भी सामुदायिक किचन नहीं चलता था और इस बार भी यहां व्यवस्था नहीं की गई है, लोगों को आसपास के सेंटरों पर जाकर भोजन करना था.

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