बाराहाट में गरीबों के अनाज पर संकट, एसएफसी गोदाम में खुले में रखे सैकड़ों क्विंटल अनाज हो रहा बर्बाद
गोदाम में बर्बाद हो रहा अनाज. | Prabhat Khabar Network
बांका जिले के बाराहाट स्थित राज्य खाद्य निगम के गोदाम में सैकड़ों क्विंटल सरकारी अनाज खुले में पड़ा सड़ रहा है. चूहे, पक्षी और बारिश के कारण यह खाद्यान्न बर्बाद होने की कगार पर है. सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
बांका जिले के बाराहाट प्रखंड परिसर स्थित राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के प्रखंड स्तरीय गोदाम में सैकड़ों क्विंटल सरकारी अनाज खुले में रखा हुआ है. संरक्षण के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण खाद्यान्न की बर्बादी का खतरा बढ़ गया है. खुले में रखी बोरियों तक चूहे और पक्षी पहुंच रहे हैं, वहीं बारिश के दौरान छत से टपकने वाला पानी भी अनाज को नमी की चपेट में ला रहा है. कई बोरियों में रखा गेहूं खराब होने की स्थिति में नजर आ रहा है.
चूहे-पक्षियों का डेरा, बारिश की मार
गोदाम में खुले में रखे अनाज के आसपास चूहे और पक्षी दिखाई दे रहे हैं. इनके संपर्क और मल-मूत्र से खाद्यान्न के दूषित होने की आशंका बनी हुई है. वहीं जमीन पर रखी बोरियों में नमी पहुंचने से अनाज के खराब होने की स्थिति बन रही है. बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी खाद्यान्न के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम में पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए. खाद्यान्न को खुले में रखने के बजाय उसे व्यवस्थित तरीके से भंडारित किया जाना जरूरी है, ताकि गरीब उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला अनाज खराब होने से बच सके.
प्रखंड मुख्यालय में बदहाल व्यवस्था पर सवाल
सबसे गंभीर बात यह है कि गोदाम किसी सुनसान स्थान पर नहीं, बल्कि प्रखंड मुख्यालय के ऐसे हिस्से में स्थित है, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित आवाजाही रहती है. गोदाम के ठीक आगे पंचायत सरकार भवन है. विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी इसी मार्ग से गुजरते हैं तथा पंचायत सरकार भवन में उनका आना-जाना लगा रहता है.
इसके बावजूद खुले में रखे खाद्यान्न की बदहाली अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई, यह बड़ा सवाल है. स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि प्रखंड मुख्यालय में ही सरकारी अनाज के संरक्षण की ऐसी स्थिति है, तो दूरदराज के भंडारण केंद्रों की निगरानी व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है.
पीडीएस दुकानों तक पहुंचा खराब अनाज तो जिम्मेदार कौन?

सरकारी खाद्यान्न को जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों तक पहुंचाने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच जरूरी है. यदि गुणवत्ता प्रभावित अनाज बिना समुचित जांच के गरीब उपभोक्ताओं तक पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी गंभीर सवाल है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल गोदाम का निरीक्षण कराने, भंडारित अनाज की गुणवत्ता की जांच करने और खराब खाद्यान्न को अलग कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में सरकारी अनाज की ऐसी बर्बादी न हो.
अधिकारी बोले- जांच कर तय की जाएगी जिम्मेदारी
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी गोपाल कुमार गुप्ता ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही गोदाम की जांच-पड़ताल कराई जाएगी. जांच के बाद इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन सरकारी खाद्यान्न को बर्बादी से बचाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है. गरीबों की थाली तक पहुंचने वाले अनाज की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
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