24 साल बाद बना दुर्लभ संयोग! जानें कब से शुरू होगा जिउतिया व्रत और पितृपक्ष
सांकेतिक तस्वीर
पितृपक्ष, जिउतिया और शारदीय नवरात्र के पर्वों का सिलसिला 27 सितंबर से शुरू हो रहा है. 24 साल बाद जिउतिया व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है.
शंभुगंज (बांका). पितृपक्ष के आगमन से पहले लोग अपने-अपने पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण की तैयारियों में जुट गए हैं. पंडितों के अनुसार इस बार पितृपक्ष के बाद जिउतिया व्रत और फिर शारदीय नवरात्र का पर्व आएगा. पर्वों को लेकर बाजारों और गांवों में धार्मिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं.
27 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष
इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होने जा रही है. इसे लेकर लोग अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी कर रहे हैं. परिवारों में पितरों की शांति के लिए आवश्यक पूजा-पाठ और कर्मकांड को लेकर पंडितों से जानकारी ली जा रही है.
2 अक्टूबर को नहाय-खाय से शुरू होगा जिउतिया
पंडित गौरीशंकर झा के अनुसार जीवित पुत्रिका व्रत यानी जिउतिया को लेकर इस बार विशेष संयोग बन रहा है. उनके अनुसार करीब 24 वर्षों के बाद ऐसा संयोग आया है. व्रती महिलाएं 2 अक्टूबर, शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत करेंगी. इसी दिन अहले सुबह ओठगन की परंपरा भी निभाई जाएगी.
3 अक्टूबर को रखा जाएगा निर्जला व्रत
पंडित गौरीशंकर झा ने बताया कि 3 अक्टूबर, शनिवार को अष्टमी तिथि में व्रती महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी. इसी दिन प्रदोष काल में शाम 4 बजे पुष्करण विधि से पोखर का निर्माण कर उसे सुसज्जित किया जाएगा. इसके बाद विधि-विधान के साथ भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की जाएगी. व्रती महिलाएं जिउतिया व्रत कथा का श्रवण भी करेंगी.
4 अक्टूबर को होगा व्रत का पारण
जिउतिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7:38 बजे के बाद किया जाएगा. व्रती महिलाएं निर्धारित समय के बाद पारंपरिक विधि से व्रत समाप्त करेंगी.
11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्र
जिउतिया व्रत के बाद शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी. पंडित गौरीशंकर झा के अनुसार इस बार नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा.
हाथी पर देवी का आगमन और बारिश की मान्यता
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हाथी पर मां दुर्गा का आगमन अत्यधिक वर्षा का संकेत माना जाता है. इसी मान्यता के आधार पर इस वर्ष अच्छी बारिश की संभावना का संयोग बताया जा रहा है. हालांकि मौसम और वर्षा का वास्तविक पूर्वानुमान वैज्ञानिक मौसम विज्ञान पर आधारित होता है, जबकि देवी के वाहन से जुड़ी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं का हिस्सा हैं.
पर्वों को लेकर बढ़ी धार्मिक गतिविधियां
पितृपक्ष, जिउतिया और शारदीय नवरात्र लगातार आने के कारण शंभुगंज क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं. परिवारों में पूजा-पाठ और व्रत की तैयारियां शुरू हो गई हैं. वहीं पंडितों से तिथियों, पूजा विधि और पारण के समय को लेकर जानकारी ली जा रही है.
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