बांका के इस स्कूल में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे 255 बच्चे, जर्जर छत से टपकता पानी और गिरते हैं कंक्रीट के टुकड़े
सबलपुर मध्य विद्यालय के बरामदे पर पढ़ते बच्चे.
सबलपुर पंचायत का स्वर्गीय उषा रानी मध्य विद्यालय अपनी बदहाल व्यवस्था से जूझ रहा है. जर्जर भवन में 255 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ रही है. छत से पानी टपकने और कंक्रीट गिरने से बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
पंजवारा थाना क्षेत्र की सबलपुर पंचायत स्थित स्वर्गीय उषा रानी मध्य विद्यालय इन दिनों बदहाल व्यवस्था की तस्वीर बन गया है. विद्यालय में अध्ययनरत 255 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जर्जर भवन के बीच पठन-पाठन करना पड़ रहा है. विद्यालय परिसर में कुल छह कमरे हैं, लेकिन इनमें से तीन कमरे देखरेख के अभाव में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. बरसात के दिनों में शेष कमरों की छत से पानी टपकता है और कंक्रीट के टुकड़े गिरने से बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है.
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छह में तीन कमरे जर्जर, बाकी में चल रही आठ कक्षाएं

विद्यालय भवन की हालत इतनी खराब है कि तीन कमरों में प्रवेश करना भी जोखिम भरा माना जा रहा है. इसके कारण कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए महज तीन कमरे ही बचे हैं. सीमित जगह में कई कक्षाओं को एक साथ संचालित करना पड़ रहा है. जगह की कमी के कारण कई बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है. एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के बैठने से पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित होता है. बच्चों के शोर के बीच शिक्षकों के लिए पठन-पाठन कराना मुश्किल हो जाता है. विद्यालय में कुल सात शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण शिक्षक और विद्यार्थी दोनों परेशान हैं.
टूटी चारदीवारी से बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
विद्यालय की चारदीवारी भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. परिसर चारों तरफ से खुला रहने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है. स्थानीय लोगों के अनुसार विद्यालय परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगा रहता है. ऐसे में जर्जर भवन के साथ चारदीवारी का अभाव विद्यालय की समस्या को और गंभीर बना रहा है.
प्रधानाध्यापक बोले- कई बार दी गयी सूचना, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
प्रधानाध्यापक शत्रुंजय कुमार ठाकुर ने बताया कि विद्यालय की समस्याओं से शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. लगातार बनी इस स्थिति को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों में नाराजगी है.
ग्रामीणों ने की नये भवन की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए. विद्यालय का जल्द जीर्णोद्धार कराने अथवा नया भवन बनाये जाने की जरूरत है, ताकि 255 बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सके.
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