खेतों का काम निपटा तो बाबा के दरबार की ओर बढ़े कदम, भादो में कांवरियों से गुलजार हुआ बौंसी-बासुकीनाथ पथ

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बासुकीनाथ धाम जाते कांवरिये. | Prabhat Khabar Network

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खेती का काम पूरा होते ही किसान बाबा बासुकीनाथ की कांवर यात्रा पर निकल रहे हैं. उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर 'बोलबम' के जयकारे लगाते हुए...

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सावन की भीड़ थमने के बाद अब भादो में भागलपुर-बौंसी-बासुकीनाथ सड़क पर आस्था का अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है. सड़क पर केसरिया वस्त्र पहने कांवरिये, कंधे पर कांवर और जुबां पर ‘बोलबम’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. खास बात यह है कि इस यात्रा में बड़ी संख्या में किसान शामिल हो रहे हैं. खेती-किसानी के जरूरी काम पूरे करने के बाद ग्रामीण अब बाबा बासुकीनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पैदल यात्रा पर निकल रहे हैं.

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खेती का काम पूरा होते ही कांवर लेकर निकले ग्रामीण

ग्रामीण इलाकों में भादो महीने में कांवर यात्रा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. किसानों के अनुसार सावन के दौरान खेतों में बुआई, रोपाई और फसलों की देखभाल जैसे जरूरी काम रहते हैं. कृषि कार्यों में व्यस्तता के कारण उस समय धार्मिक यात्रा के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल होता है.

अब खेती का मुख्य काम पूरा होने के बाद गांवों में लोग समूह बनाकर बाबा बासुकीनाथ की यात्रा पर निकल रहे हैं. कई किसान अपने साथ गांव के दूसरे श्रद्धालुओं को भी जोड़कर पैदल यात्रा कर रहे हैं.

उत्तरवाहिनी गंगा से शुरू होती है यात्रा

श्रद्धालु भागलपुर की उत्तरवाहिनी गंगा से अपनी कांवर यात्रा शुरू करते हैं. यहां गंगा जल भरने के बाद कांवर लेकर पैदल बासुकीनाथ धाम की ओर बढ़ते हैं. सुबह से देर शाम तक भागलपुर-बौंसी-बासुकीनाथ मार्ग पर कांवरियों की आवाजाही बनी हुई है.

कई टोलियों में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं. समूह में चल रहे कांवरियों के बीच ‘बोलबम’ के जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आ रहा है.

खेतों की हरियाली के बीच दिख रहा केसरिया रंग

इन दिनों सड़क के दोनों ओर खेतों में हरियाली है और इसी बीच केसरिया वस्त्रों में कांवरियों की टोलियां आगे बढ़ती दिखाई दे रही हैं. कहीं किसान समूह बनाकर यात्रा करते नजर आ रहे हैं, तो कहीं महिलाएं और युवा कांवर लेकर बाबा धाम की ओर जाते दिख रहे हैं.

किसानों के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है. मेहनत भरे कृषि कार्यों के बाद परिवार और गांव के लोगों के साथ सामूहिक रूप से यात्रा करना उनके लिए श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का अवसर भी बन गया है. भादो की इस कांवर यात्रा ने भागलपुर-बौंसी-बासुकीनाथ मार्ग पर आस्था का एक अलग रंग दिखा दिया है.

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