पंजवारा में किसानों पर दोहरी मार: सुस्त मानसून के बीच पंपसेट के भरोसे धान रोपनी, जुताई और मजदूरी के दाम भी आसमान पर

Updated:
विज्ञापन

पंपिंग सेट के सहारे धान रोपनी को मजबूर किसान | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

बांका जिले में धान की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है. मानसून की कमी, डीजल और मजदूरी की आसमान छूती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. वे पंपिंग सेट के सहारे सिंचाई कर रोपनी करने को मजबूर हैं.

विज्ञापन

बांका जिले के पंजवारा और आस-पास के सीमावर्ती इलाकों में इस चालू खरीफ सीजन में धान की खेती करना किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है. एक तरफ जहां मानसून की बेरुखी और पर्याप्त बारिश न होने के कारण खेतों की नमी गायब है, वहीं दूसरी तरफ डीजल, जुताई और खेतिहर मजदूरों की आसमान छूती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. समय पर धान का बिचड़ा (पौधा) तैयार हो जाने के कारण, किसान अब मजबूरी में भारी-भरकम लागत उठाकर पंपिंग सेट के सहारे सिंचाई कर किसी तरह रोपनी कार्य में जुट गए हैं.

विज्ञापन

ट्रैक्टर जुताई से लेकर मजदूरी तक सब कुछ हुआ महंगा

खेतों की तैयारी से लेकर धान की कतारबद्ध रोपनी तक, हर स्तर पर किसानों को पिछले साल की तुलना में जेब काफी ढीली करनी पड़ रही है:

  • ट्रैक्टर जुताई का बढ़ा भाड़ा: पिछले साल तक खेतों की जो जुताई ₹1100 प्रति घंटा की दर से होती थी, वह इस सीजन में बढ़कर ₹1300 से ₹1400 और कई इलाकों में ₹1500 प्रति घंटा तक पहुंच गई है. ट्रैक्टर मालिकों का साफ कहना है कि डीजल की बढ़ी कीमतों और मेंटेनेंस खर्च के कारण वे पुरानी दरों पर सेवा देने में असमर्थ हैं.
  • खेतिहर मजदूरों के बदले तेवर: खेतों से बिचड़ा उखाड़ने (निकालने) के लिए जो मजदूर पहले ₹400 लेते थे, वे अब ₹450 की मांग कर रहे हैं. वहीं, धान की रोपनी करने वाली महिला मजदूरों ने भी अपनी दिहाड़ी बढ़ाकर ₹300 से ₹350 प्रति दिन कर दी है.

बिजली की आंख-मिचौली और लो-वोल्टेज ने बढ़ाई फजीहत

सरकारी दावों के उलट, ग्रामीण इलाकों में कृषि कार्य के लिए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था बेहद लचर बनी हुई है:

  1. लगातार ट्रिपिंग: खेतों की सिंचाई के समय ही ग्रामीण फीडरों में बिजली की आंख-मिचौली (आवाजाही) शुरू हो जाती है.
  2. लो-वोल्टेज का संकट: यदि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली रहती भी है, तो वोल्टेज इतना कम (लो-वोल्टेज) होता है कि किसानों के भारी-भरकम मोटर और पंप सेट चालू ही नहीं हो पाते. ऐसे में किसानों को मजबूरन महंगे दाम पर डीजल खरीदकर पंपिंग सेट चलाना पड़ रहा है, जिससे प्रति एकड़ सिंचाई की लागत दोगुनी हो गई है.

चिलचिलाती धूप और उमस के बीच अन्नदाता का संघर्ष

स्थानीय किसानों का कहना है कि आसमान में कभी घने बादल छा जाते हैं तो कभी तीखी धूप निकलने लगती है, जिससे उमस भरी गर्मी बढ़ जाती है. इस भीषण तपिश का हवाला देकर भी मजदूर काम करने से कतरा रहे हैं या ऊंची दरें मांग रहे हैं. पंजवारा क्षेत्र के किसान इस समय तिहरे संकट (कम बारिश, महंगी लागत और लचर बिजली व्यवस्था) के बीच अपनी फसलों को जिंदा रखने की जद्दोजहद में जुटे हैं. क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन से कृषि फीडरों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने और सिंचाई के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है.


आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन