खाद्यान्न, फल व सब्जियों में मिलावट के कारण पड़ रहे बीमार

Published at :06 Jan 2016 8:28 AM (IST)
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खाद्यान्न, फल व सब्जियों में मिलावट के कारण पड़ रहे बीमार

बांका : जिले के बाजार में मिलावटी सामग्री की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. खास कर व्रत त्योहारों में इसकी आशंका अधिक बढ़ जाती है. मिलावटी सामान दुकानों में सज जाते हैं. त्योहार के दिनों में मिठाई व अन्य सामग्री को जांच कर ही खरीदना चाहिए. इतना ही नहीं मशाला, हल्दी, दलहन, तेलहन, फल […]

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बांका : जिले के बाजार में मिलावटी सामग्री की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. खास कर व्रत त्योहारों में इसकी आशंका अधिक बढ़ जाती है. मिलावटी सामान दुकानों में सज जाते हैं. त्योहार के दिनों में मिठाई व अन्य सामग्री को जांच कर ही खरीदना चाहिए. इतना ही नहीं मशाला, हल्दी, दलहन, तेलहन, फल सब्जी या खाद्यान्न में भी मिलावट होती है. इस मिलावटी सामान के उपयोग से कई तरह की बीमारी हो सकती है.
कुछ दुकानदार की गलती, भुगतते हैं सभी: व्यवसायियों ने बताया कि मिलावटी सामान बेचने वाले कुछ दुकानदारों के कारण अन्य व्यवसायियों का भी कारोबार प्रभावित होता है. मिठाई दुकानदार ने बताया कि बूंदी की लड्डू बनाने में चना के बेसन में मैदा, चौरठ, मटर बेसन की मिलावट होती है.
जबकि पनीर में आरारोट, पेड़ा बनाने के लिए खोवा में सुज्जी, आरारोट के साथ अधिक चीनी मिलायी जाती है. खाद्यान्न कारोबारी का कहना है कि सरसों तेल में ड्रॉप्सी मिक्स किया जाता है. इससे तेल में झांस बढ़ता है, हालांकि इसका असर काफी हानिकारक होता है. शुद्ध घी में वनस्पति तेल मिलाया जाता है. ऐसा घी धनबाद, कानपुर, ग्वालियर आदि स्थानों से मिक्स होकर आता है. किराना दुकानदारों का कहना है कि दाल को सुरक्षित करने के लिए पॉलिस किया जाता है और चावल में चमक लाने के लिए यूरिया मिलाया जाता है.
बांका : मिलावट के संबंध में अंजू देवी, सपना झा, खुशी कुमारी, कोमल भगत, रिचा कुमारी ने बताया कि करेला, परवल को जब धोया, तो पानी का रंग हरा दिखने लगा. बाजार में कई सामान ऐसा मिलता है जो एकदम ताजा लगता है, लेकिन जब घर पर इसकी सब्जी बनाने के लिए धोते हैं, तो रंग निकलने के बाद वह बासी निकलता है.
सेब को अधिक ताजा बनाये रखने के लिए मोम या कैमिकल की परत डाल दी जाती है. लकी कुमारी, लबली कुमारी, बुलबुल कुमारी शानभी कुमारी, जुली भगत ने बताया कि अरहर, मसूर व मूंग दाल को धोने पर पानी उजला रंग का हो जाता है. कई बार धोना पड़ता है. कम हल्दी देने पर भी सब्जी रंग जाती है, लेकिन सब्जी का स्वाद गड़बड़ हो जाता है. वहीं मिर्च पाउडर देखने में तो बहुत लाल लगता है, लेकिन उसमें तीखापन नहीं के बराबर होता है. इससे लगता है कि इसमें रंग की मिलावट की गयी है.
मिलावट करने वाले के विरुद्ध होगी कार्रवाई
फूड इंस्पेक्टर मो इकबाल ने बताया कि बाजार में मिलावट सामग्री बिकने की जानकारी मिली थी. सूचना मिलते ही दिसंबर में दर्जनों मिठाई व किराना दुकान में छापेमारी कर मिठाई, सरसों तेल, दाल आदि जब्त कर जांच के लिए भेजा गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद दुकानदार के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. छापेमारी अभियान शहर में जारी रहेगी जो भी दुकानदार मिलावटी सामग्री बेच रहे है उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी.
नहीं बंटा कंबल, न जल रहा अलाव
आपदा विभाग के ठंड लगने के मानक के अनुरूप मौसम हो गया है. हालांकि पूस की रात में भी गरीब एक कंबल के लिए तरस रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार की ओर से आयी कंबल और अलाव की राशि फाइलों में दब कर रह गयी है. अब तक शहर में मात्र तीन स्थानों पर तीन दिन ही अलाव जली है. जिला प्रशासन ने आपदा विभाग के बजट को विभिन्न अंचल में भेज दिया है.
साथ ही सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों ने भी डेढ़ लाख की राशि अनुमंडल पदाधिकारी को भेज दी है. उस पैसे से अनुमंडल पदाधिकारी खादी का कंबल खरीद कर सभी अंचलाधिकारी को भेजेंगे. सूत्रों के अनुसार एक अंचल में महज 50 से 60 कंबल ही पहुंचेंगे. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि गरीबों की पूस की रात कैसे कटेगी.
-फाइलों में बंद है कंबल, गरीबों की कैसे कटेगी पूस की रात
बांका : जिलावासी ठंड व कनकनी से परेशान है. एक पखवारे में मौसम विभाग के रिकार्ड के अनुसार न्यूनतम तापमान पांच से आठ डिग्री तक रहा है. यह आपदा विभाग के मानक न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान के मानक पर भी फिट बैठ रहा है. इतना सब होने के बाद भी आपदा विभाग का अलाव जलाने का फंडा फाइल से निकल हकीकत में नजर नहीं आ रहा है.
जिले के अंचलों में अलाव के लिए लकड़ी खरीद के लिए बजट भेजा गया है. इस बार जिले को मिले महज 50 हजार के बजट से अधिकतम तीन दिनों तक ही अलाव जला कर ठंड कम किया जा सका. स्थानीय लोग पूछ रहे कि अब अलाव कैसे जलेगा. रिक्शा चालक से लेकर अन्य जरूरत मंद खुद जुगाड़ कर अलाव जला रहे हैं.
जल्द हो कंबल का वितरण: स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य सरकार ने न जाने क्या सोच कर गरीबों के लिए इतनी कम राशि जिले में भेजी है. इससे तो महज 300 से 400 गरीबों को ही कंबल मिल पायेगा. इनका कहना है कि जिले में बीपीएल रेखा से नीचे रहने वाले हजारों परिवार हैं.
ऐसे में जिला प्रशासन किस जरूरत मंद लोगों को कंबल देगा और किसको निराश करेगा, यह तो वितरण के बाद ही पता चलेगा. फिलहाल जिला प्रशासन जितना जल्द हो कंबल का वितरण कर दे, ताकि कुछ गरीबों का बदन ढंक जाय.
तीन स्थानों पर ही जला अलाव: शहर के तीन स्थानों गांधी चौक, डीएम कोठी चौक तथा सदर अस्पताल के पास अलाव की व्यवस्था की गयी थी. तीन दिनों में महज कुछ किलो लकड़ी जलने के बाद यह व्यवस्था भी बंद कर दी गयी है. अभी पूस का दस दिन बांकी हैं. ऐसे में गरीब कैसे अपनी रात काटेंगे.
कंबल के लिए मिला है 1.74 लाख
सामाजिक सुरक्षा कोषांग के निदेशक कुमार सत्यकाम के अनुसार इस वर्ष पूरे जिले में कंबल वितरण के लिए 1.74 लाख रुपये आये हैं. इसको अनुमंडल पदाधिकारी के पास भेज दिया गया है. वहीं अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि सुरक्षा कोषांग से आयी राशि से खादी भंडार से कंबल खरीद कर सभी अंचल सहित दोनों नगर पंचायत क्षेत्र में भेजा जायेगा.
तीन वर्ष से नहीं बढ़ा बजट
आपदा विभाग के पिछले तीन वर्ष से अलाव के लिए बजट नहीं बढ़ाया है. इस कारण इस बार भी बजट 50 हजार रुपये ही है. जबकि लकड़ी की कीमत तीन सालों में दो गुनी से अधिक हो गयी है. इस वर्ष शीतलहर में मिले बजट से अंचल (दो नगर पंचायत तथा ग्यारह अंचल) को चार हजार से भी कम राशि मिली है.
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